भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार मोदी और उनके समर्थक दावा कर रहे हैं कि गुजरात में दुग्ध क्रांति मोदी द्वारा लाई गई थी पर अति उत्साह में मोदी व उनके भक्त नहीं जानते कि सारी दुनिया ं verghese-kurien को दुग्ध क्रांति का प्रणेता मानती है । प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी यह भी भूल गए कि डॉ. कुरियन ने अपनी जन्मभूमि केरल को भूल गुजरात के एक छोटे से गांव को अपनी कर्मभूमि बनाया था। सत्ता के मोह के चलते मोदी इतिहास रचने की जगह इतिहास झुठलाने में ज्यादा यकीन रखते हैं।
श्वेत क्रांति के जनक डॉ् वर्गीज कुरियन की जीवटता आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। शहर की चकाचौंध से प्रभावित युवा जहां अपना गांव कस्बा छोडऩे में जरा सी भी देर नहीं लगाते वहीं विदेश में पढ़ाई कर केरल की बजाय गुजरात के एक गांव को अपनी कर्मभूमि बनाना डॉ कुरियन के बूते की ही बात थी। न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे देश के लिए सपने बोना और उन्हें एक वटवृक्ष का आकार देना आसान नहीं था लेकिन कुरियन ने सिर्फ सपने देखे बल्कि उसे साकार भी किया। 26 नवम्बर1921 को केरल में जन्मे डॉण् कुरियन ने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया। डॉण् कुरियन 13 मई 1949 को आणद आ आए कुरियन के लिए चुनौतियां कम न थी। केरल के ईसाई समुदाय का होने के कारण कोई उन्हें अपना घर देने को तैयार नहीं था। यहां आणद डेयरी में नौकरी करने के साथ ही कुरियन के मन में भारत को दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सपना भी था। त्रिभुवन नारायण पटेल ने कठिन समय में कुरियन की मदद की उन्हें अपने गैराज में रहने की व्यवस्था की। गुजरात के आणद में पहले दुगध संघ की नींव पड़ी। आणद डेयरी की सरकारी नौकरी छोड़ इस संघ में शामिल हुए कुरियन ने जो किया वह इतिहास बन गया। दूध को सुरक्षित रखने के लिए कुरियन ने 11 महीने की मेहनत के बाद जो मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया वह उस समय तक देश का सबसे आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट था। यहीं शुरू हुआ अमूल ब्रांड का दूध। कुरियन के दूध की प्रोसेसिंगए आधुनिक मार्केटिंग ने किसानों की किस्मत ही बदल दी। दूध के सुरक्षित होने के साथ ही उनका भविष्य भी सुरक्षित हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कुरियन के इस प्रयास का प्रयोग राष्टड्ढ्रीय स्तर पर किया और पहली बार देश में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड का गठन हुआ। दिल्ली की मदर डेयरी और कई अन्य राज्यों के सहकारी दुग्ध संघ इसी बोर्ड की देन हैं। कुरियन की एक महत्वूपूर्ण उपलब्धि यह है कि उन्होंने भैंस के दूध का पाउडर बना कर दुनिया अचंभित कर दिया। इससे पहले माना जाता था कि गाय के दूध से ही पाउडर बनाया जा सकता था । भारत में दूध उत्पादन का मुख्य आधार गाय नहीं भैंस रही हैं इस बात को कुरियन अच्छी तरह से जानते थे। तभी उन्होंने कड़ी मेहनत कर भैस के दूध को पाउडर में बदल कर दिखाया। श् वेत क्रांति के जनक डॉ कुरियन को भारत सरकार ने पदमश्रीए पदमभूषणए कृषि रत्नए पदम विभूषण जैसे अवॉर्डों से सम्मानित किया। साथ ही विदेशों में भी उन्हें कई सम्मान मिले। आणंद मिल्क यूनियन और डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड पर कुरियन लम्बे समय तक काबिज रहे। बावजूद इसके कि वे निर्वाचित प्रतिनिधि थे और प्रचार से सदैव दूर रहते थे। यह भी सच है कि 60 की उम्र के बाद भले ही वे लगातार चेयरमैन के पद के लिए चुने जाते रहेए लेकिन इस उम्र के बाद उन्होंने कभी एक भी पैसा वेतन के रूप में नहीं लिया। भ्रष्टड्ढाचार के इस दौर में कुरियन का चरित्र एक मिसाल है। ऑपरेशन फ्लड के जरिए भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने वाले कुरियन हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। मोदी जी इतिहास बनाइए लेकिन किसी का अपमान तो मत करिए। खासतौर पर कुरियन का जो समूची दुनिया के लिए आदर्श हैं और रहेंगे।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.