नई दिल्ली। सूबे में सरकार बनाने के पक्षधर भाजपा विधायकों को भले ही दीपावली पर सरकार का तोहफा मिलने की उम्मीद रही हो लेकिन राजधानी की सियासत की पहेली फिलहाल सुलझती नहीं दिख रही है। राजनिवास को अब भी राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार है।

आपको बता दें कि राजधानी की सियासी किस्मत तय करने को लेकर दो स्तरों पर निर्णय लिया जाना है। सबसे पहले विधानसभा में सबसे बड़े दल भाजपा को यह तय करना है कि वह नए सिरे से चुनाव मैदान में उतरना पसंद करेगी अथवा अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाएगी। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्रिमंडल को उपराज्यपाल नजीब जंग की उस सिफारिश पर निर्णय लेना है जिसमें जंग ने दिल्ली विधानसभा को भंग करने के बजाय सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का एक मौका देने की सिफारिश की है। राष्ट्रपति ने इस मामले को गृह मंत्रालय के पास भेजा हुआ है। अब गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद ही राष्ट्रपति उपराज्यपाल को अपना संदेश भेजेंगे। जाहिर तौर पर दोनों ही स्तरों पर फैसला भाजपा के बड़े नेताओं को ही लेना है क्योंकि केंद्र में भाजपा की ही सरकार है और दिल्ली में भी उसकी ही सरकार बननी है।

भाजपा के आला नेता फिलहाल हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार के गठन में व्यस्त हैं। ऐसी उम्मीद नहीं है कि अगले एक-दो दिन में दिल्ली को लेकर कोई निर्णय होगा। दिल्ली पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देने के लिए सरकार के पास 28 अक्टूबर तक का वक्त है। ऐसे में ज्यादा संभावना यह है कि दीपावली बीतने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

भाजपा के दिल्ली के नेताओं के बयान से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि आखिर पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी अथवा उसका सरकार बनाने का इरादा बरकरार है। भाजपा के नेता यह दावा करते रहे हैं कि पार्टी चुनाव से भागने वाली नहीं है और वह ताल ठोक कर मैदान में उतरने को तैयार है। लेकिन सरकार बनाने के विकल्प को अभी पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा रहा है।rajnath-singh4~21~10~2014~1413866216_storyimage

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