downloadबहुत पुरानी एक फिल्म पिछले दिनो केबल पर चल रही थी वक्त। जिसमे एक डायलाग था फिल्म के कलाकार राजकुमार रहमान से कहते हैं कि चिनाय सेठ जिनके घर खुद शीशे को हों वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते। रविवार को जब रविशंकर दामाद श्री के नाम से सीडी रिलीज कर रहे थे तब यही डायलाग बार बार याद आ रहा था। अपने भाजपाई दामादों को भूल मोदी एंड कम्पनी राबर्ट को नायक बनाने पर तुली थी। राबर्ट वाडरा के अमीर बनने का मॉडल पूछने से अच्छा था कि देश सबसे अमीर आदमी के अमीर बनने का मॉडल पूछना चाहिए था। खैर यहां बात हो रही थी दामादों की मोदी जी ने जब पत्नी को पत्नी नहीं माना तो औलाद का सवाल ही नहीं उठता लेकिन देश के सबसे अमीर आदमी के दामाद को अपने मंत्रिमंडल में जगह देकर दामाद का मान रखा। वहीं श्री अटल बिहारी वाजपेयी की मुंहबोली बेटी के दामाद रंजन भट्टïाचार्य को भी भूल गई भाजपा। वाडरा से मुकाबले के लिए भाजपा के पास तो दो दो दामाद पहले से ही हैं बाकी चुनाव मैदान में हैं जो जीतने के बाद सत्ता का लुफ्त उठाएंगे। एक भाजपाई दामाद रंजन भट्टïाचार्य पर आउटलुक ने अपने एक अंक में विशेष खबर के रूप में छापा था। भाजपा नेताओं के कई दामादों के अच्छे दिन आने वाले हैं। मोदी सरकार में कई भाजपाई दामाद आबाद होंगे।

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