कांग्रेस व सरकार के संकटमोचक प्रणब दादा अपनी बिदाई पर बेहद भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि

हो सकता है कि मेरे द्वारा लिए गए सारे फैसले सही नहीं हों, लेकिन मैंने वे फैसले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिए थे। दादा चिदम्बरम विवाद पर चुप्पी साध गए हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ हुआ भी था मुझे याद नहीं।

मीडिया ने आलोचना की हो या सराहना, हमेशा ही मुझे मेरी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। मैं आप सभी लोगों द्वारा नॉर्थ ब्लॉक में मेरे ऑफिस के सामने कार में प्रवेश करते समय या कार से बाहर आते समय रोके जाने को मिस करूंगा।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवारी दाखिल करने के लिए मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भावुक दिख रहे प्रणब ने राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अपने चार दशक के कार्यकाल को पीछे छोड़ मंगलवार को एक नई यात्रा की शुरुआत की। 19 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौंप कर वित्त मंत्रालय में अपने तीन साल के कार्यकाल को समाप्त किया।

कांग्रेस के 77 वर्षीय नेता प्रणब ने इस्तीफा देने के लिए अपने नार्थ ब्लॉक ऑफिस से निकलते समय कहा कि मैं अब अपनी नई यात्रा की तैयारी की शुरूआत कर रहा हूं। उन्होंने मीडिया एवं अन्य सभी की उनके समर्थन के लिए काफी सराहना की। यूपीए सरकार के संकटमोचक और लोकसभा के नेता मुखर्जी के गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करने की उम्मीद है।ऐसे आसार हैं कि वित्त मंत्रालय का जिम्मा कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री खुद संभालेंगे।

वित्त मंत्री के रूप में अपने अंतिम संदेश में उन्होंने कहा कि सपा, बसपा, जद(यू), शिव सेना, सीपीआई-एम, फॉरवर्ड ब्लॉक तथा कुछ अन्य दलों के समर्थन से राष्ट्रपति पद का चुनाव लडऩे के लिए यूपीए के उम्मीदवार चुने जाने पर वह काफी सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

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