ज्योतिषाचार्य डॉ. हेमलता पाठक
डायरेक्टर-शिव शक्ति ज्योतिष केन्द्र                                                                                            तपस्या अर्थात अपने आपको तपाना। जैसे सोने को तपाने से मिलावट बाहर हो
जाती है और सोना खरा-खरा बचता है इसी प्रकार स्वयं को तपस्या करके अर्थात
तपाकर खरा बनाना क्योंकि महाशक्ति के पावर ग्रिड से जुड़कर डायरेक्ट
कनेक्शन लेना है तो बहुत ही शक्तिशाली तार-वायर का केबिल होने चाहिए,
हल्का वायर होगा तो भ्रष्ट हो जायेगा, जल जाएगा। उसी प्रकार महाशक्ति के
डायरेक्ट पावर ग्रिड से कनेक्शन लेने के लिए महाशक्तिशाली केबिल और
ट्रांसफारमर (गुरु) होना चाहिए एवं स्वयं भी तपस्या करके अपनी आत्मा रूपी
केबिल को मजबूत बनाना होगा और यह बनाने के लिए सोचने का समय नहीं, बस
करने का समय है। यदि केवल सोचते रह गये तो आपको प्राप्त समय समाप्त हो
जायेगा। इसलिए कहा गया है कि- जब तलक रहेगी जिंदगी, फुरसत न होगी काम से।
अर्थात जब तक इस शरीर में रहोगे, काम से फुर्सत नहीं मिलेगी। क्योंकि
कर्म ही प्रधान है। गोस्वामी तुलसी दास जी करते हैं- कर्म प्रधान विश्व
करि राखा। जो जस करय सो तस फल चाखा।
एक श्रमिक सुबह से शाम तक सड़क पर गिट्टी फेंकता है, खेत में फावड़ा चलाता
है तो क्या वह कभी अमीर बन सकता है। क्यों कि वह भी तो कर्म कर रहा है।
तो आप कहेंगे कि- जो जस करय सो तस फल चाखा। कर्म तो प्रधान है लेकिन जो
जैसा काम करेगा उसे उसके कर्म का वैसा-उसके अनुरूप पारिश्रमिक मिलेगा।
यहां श्रम और मस्तिष्क चेतना शक्ति के परिष्कृत योग के परसेन्टेज पर
निर्धारित है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने बताया था कि
मनुष्य का मस्तिष्क 7 प्रतिशत ही खुला होता है। 93 प्रतिशत उसका मस्तिष्क
बंद होता है। और ये 7 प्रतिशत भी अति उच्च स्तरीय लोगों का ही खुला हाता
है। ऐसे ही लोग आविष्कारक या वैज्ञानिक बनते हैं। उसके अलावा अन्य लोगों
का मस्तिष्क केवल 1,2,3,4 या 5 से 6 प्रतिशत ही खुला होता है। (क्रमश:)

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