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नई दिल्ली : 2010 के कामनवेल्थ खेलों से पहले दिल्ली में टी3 टर्मिनल का निर्माण करने की आड़ में सरकार ने जीएमआर ग्रुप की कंपनी डायल को जिस तरह अंधाधुंध सौगातें बांटीं उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है. डायल को न केवल कौडिय़ों के भाव जमीन दी गई, बल्कि हेरफेर कर उसे 30 के बजाय 60 साल तक एयरपोर्ट चलाने का ठेका दे दिया. इस तरह डायल को मात्र 1813 करोड़ रुपये की इक्विटी पर 24 हजार करोड़ की जमीन और उससे 1.63 लाख करोड़ की भावी कमाई की खुली छूट दे दी गई. इतना ही नहीं उसे नाजायज तरीके से एयरपोर्ट विकास शुल्क वसूलने का अधिकार भी दे दिया गया.
संसद में शुक्रवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के मखौल का आघातकारी पूरा ब्योरा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 3 मई 2006 को सरकार ने आपरेशन, मैनेजमेंट डेवलपमेंट समझौते (ओएमडीए) के तहत दिल्ली एयरपोर्ट के पुननिर्माण का जिम्मा डायल को सौंपा था. 26 अप्रैल 2006 को डायल के साथ स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट (एसएसए) किया गया. कैग के अनुसार,  डायल को फायदा पहुंचाने के लिए इन समझौतों के साथ या तो छेड़छाड़ की गई या इन्हें नजरअंदाज किया गया. मसलन, ओएमडीए में कहीं भी एयरपोर्ट डेवलपमेंट शुल्क का प्रावधान नहीं था, लेकिन बाद में उड्डयन मंत्रालय व एयरपोर्ट इकोनामिक रेगुलेटरी अथारिटी (एईआरए) ने डायल को यह शुल्क वसलूने की अनुमति दे दी. इससे उसे 3415.35 करोड़ का फायदा पहुंचा.
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल 5106 एकड़ है. इसमें से 4608.9 एकड़ जमीन डायल को मात्र 100 रुपये के लीज रेंट पर दे दी गई, जबकि सही रेंट लगाया गया होता तो डायल को 1461 करोड़ देने पड़ते. एयरपोर्ट के निर्माण में 12502 करोड़ की पूंजी लगी. इसमें प्रमोटरों (डायल और एयरपोर्ट अथारिटी) की 2450 करोड़ की इक्विटी में से डायल की इक्विटी केवल 1813 करोड़ (74 फीसद) थी. इसके अलावा 5266 करोड़ कर्ज से, 1471 करोड़ सिक्यूरिटी डिपाजिट से, 3415 करोड़ एयरपोर्ट डेवलपमेंट शुल्क से जबकि 50 करोड़ आंतरिक संसाधन से आए. इस तरह दो हजार करोड़ रुपये से भी कम लगा कर डायल ने न सिर्फ 60 साल के लिए दिल्ली एयरपोर्ट हथिया लिया, बल्कि 24 हजार करोड़ की जमीन और उससे संभावित 1,63,557 करोड़ की कमाई के अधिकार भी हासिल कर लिए. कैग ने दिल्ली एयरपोर्ट में मात्र 50 करोड़ रुपये के आंतरिक संसाधन पर भी सवाल उठाया है, क्योंकि मुंबई एयरपोर्ट के मामले में यह राशि 1999 करोड़ रुपये है.

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