joshiकानपुर में भाजपा उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता ने पत्रकार सुमित अवस्थी को भी रजत शर्मा समझ लिया और मनचाहे सवाल पूछने को कहने लगे पर उन्हें नहीं मालूम कि हर पत्रकार बिकाऊ नहीं होता
सियासत की भूख में आये दिन कद्दावर से कद्दावर नेता अपने बेहूदा और गलत बयानबाजियों में फसते जा रहे हैं लेकिन कानपूर बीजेपी के उम्मीदवार नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी को अपने ही नेता से कोफ़्त हैं आखिर क्यों? मोदी जी की लहर में हर नेता बहने को तैयार बैठा है फिर न जाने क्यों ज़ी मीडिया के वरिष्ठतम पत्रकार श्री सुमित अवस्थी जी ने जोशी जी से पोस्टर्स को लेकर एक सवाल किया कि जिस तरह हर शहर में पोस्टर्स लगे हैं की “अबकी बार भाजपा सरकार, पर कहीं ये नहीं लिखा के अबकी बार मोदी सरकार” तो जोशी जी भड़क गए और मीडिया से बदजुबानी कर गए. मीडिया के साथ ये पहली वारदात है जिसमे एक बड़े नेता ने ये कहा हो के विडिओ डिलीट करो वरना बाहर नहीं जाने दूंगा, हालांकि मीडिया को खुद की तरह शून्य समझने वाले नेता को ये नही पता था की मेरे पीछे से भी एक कैमरा है और अंततः अवस्थी जी ने बड़ी शालीनता से उनके कहने पर वो कैमरा उन्हें सौपा और करवा दिया डिलीट, होना क्या था उनकी हर हरकत कैमरे में कैद हो रही थी, सारी बातों को देखने सुनने के बाद एक बात समझ में नही आई की जिस इंसान के नाम से आज भाजपा खुद के अस्तित्व को बनाने में लगी है वहीँ दूसरी तरफ भाजपा के ही वरिष्ठतम और उम्रदराज़ चचा डॉ मुरली मनोहर जोशी जी को मोदी से आखिर इतनी दिक्कत क्यों है? फ़िलहाल मीडिया के साथ नेता फिक्स मीटिंग करके हीरो बनते चले आ रहे है पर हर इंसान और हर पत्रकार एक सा नही होता। सुमित अवस्थी पत्रकारिता जगत के एक नामचीन, शालीन और तेज़ पत्रकारों में से है, वो खुद इतनी कूवत रखते हैं के जोशी जी के आवास से बाहर निकल सकते थे बिना डिलीट करवाये पर उन्होंने बड़ी शालीनता से हँसते हुए सारे मंज़र के मज़े लिए और जोशी ने कहा के हम डायरेक्ट करेंगे के इंटरव्यू में क्या पूछो, पर स्वाभिमानी और नौकरी से समझौता किये बिना बाइज़्ज़त सुमित अवस्थी टीम के साथ वापस आ गए और सबसे बड़ा ताज्जुब ये है के तमाम नेता जो मोदी जी को अपना देवता मान चुके हैं वो मोदी जी के नाम से तकलीफ रखने वाले अपने खुद के नेता को नहीं संभाल पा रहे और न ही उस नेता की खिलाफत कर रहे हैं जबकि इसी जगह कोई और नेता ने मोदी की खिलाफत की होती तो सब टूट पड़ते। फिलहाल जाते-जाते एक बात कहना चाहूंगा के पत्रकार समाज का एक जीता जागता आइना है कृपया आईने को संभाल के रखिये वरना एक रोज़ अपने चेहरे की शिकन को देखने के लिए दलदल के मैले पानी में अपनी परछाई देखने से आप गुरेज़ नही कर पाएंगे नेता जी.

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