पेस-भूपति व टेनिस संघ की जिद से भारत के टेनिस में पदक की उम्मीद धुंधली नजर आने लगी है। बता रहे हैं सैय्यद मोहम्मद अब्बास
लंदन ओलम्पिक में भारत यदि किसी खेल में पदक की आस लगा सकता है तो वह हैं टेनिस और शूटिंग। टेनिस में जिस व्यक्ति के पास वाइल्ड कार्ड एंट्री है वो हैं लिएंडर पेस। पेस को मनाने के लिए टेनिस संघ ने अपना दूत लंदन भेजा है पेस के बिना ओलम्पिक में पदक की उम्मीद भी बेकार ही है। लेकिन अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की मूर्खता से लगता है इस खेल में भारत अब पदक खो देगा।।क्योंकि जिस खिलाड़ी की पीठ पर लदकर अन्य खिलाडिय़ों को जाना था उसी के साथ राजनीति (हमारा नेशनल गेम) हो गई है। पेस के साथ अंतिम समय में भूपति और बोपन्ना ने खेलने से इन्कार कर दिया है। राजनीति से दुखी पेस भी अब अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए हैं और उन्होंने भी लंदन ओलम्पिक में जाने से लगभग मना कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि एआईटीए ने काफी समय पहले ही जोड़ी का निर्धारण क्यों नहीं कर दिया और उसे खेलों के सबसे बड़े महाकुम्भ ओलम्पिक के लिए भारतीय टेनिस संघ ने आखिरकार दोबारा टीम की घोषणा क्यों करनी पड़ी। अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) ने गुरुवार को ओलम्पिक पुरुष युगल में दो टीमें भेजने का फैसला कर लिया। इसके बाद यह भी तय हो गया कि लिएंडर पेस को अब कम रैंकिंग वाले विष्णु वर्धन (२०७ रैकिंग) के साथ जोड़ी बनानी पड़ेगी जबकि महेश भूपति और रोहन बोपन्ना के रूप में दो टीमें होंगी। एक स्थिति में पेस खेलने के लिए तैयार हो सकते हैं यदि मिश्रित युगल में जोड़ी सानिया मिर्जा के साथ बने। लेकिन भूपति को यह नागवार गुजरेगा। भूपति और सानिया ने हाल में फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था। यदि सानिया 28 जून को ओलंपिक के लिए वाइल्ड कार्ड हासिल कर लेती हैं, तो वह पेस के साथ जोड़ी बनाएंगी, क्योंकि इन दोनों की संयुक्त रैंकिंग से उन्हें इस खेल महाकुंभ में सीधे प्रवेश मिल जाएगा। लेकिन सानिया फ्रेंच ओपन के बाद कह चुकी है कि वह भूपति के साथ जोड़ी बनाने को प्राथमिकता देगी। इस विवाद ने एक बात तो साफ कर दी है कि खेल से बड़ा खिलाड़ी होता है। यहां देश-प्रेम नहीं, अहंकार पहले आता है।लंदन ड्रीम्स का सपना देख रहे खिलाड़ी सोच भी नहीं सकते हैं कि इस हरकत से भारतीय टेनिस को कितना बड़ा धक्का लगा है। सवाल यह भी है कि लिए कौन जिम्मेदार है। दरअसल विवाद में एआईटीए भी उतना ही जिम्मेदार है जितना दोनों खिलाड़ी। ओलम्पिक को ध्यान में रखकर ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन को यह पहले से ही तय कर लेना चाहिए था कि पेस के साथ कौन जाएगा। जानकारों की मानें तो अक्टूबर-नवम्बर में अगर एआईटीए को लगता था कि ओलम्पिक में पेस और     भूपति की जोड़ी ही सबसे अच्छी है तो उस समय भूपति को बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाने से क्यों नहीं मना किया।
ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन दोनों खिलाडिय़ों के बीच चल रहे विवाद को खत्म करने का दावा कर रहा है। एआईटीए ने ऐसी टीम चुनी है जिससे पदक की आस लगाना अभी जल्दीबाजी होगी। इंडियन एक्सप्रेस के नाम से विख्यात यह जोड़ी पटरी से तो पहले उतर चुकी थी। लोगों की उम्मीद थी देश की खातिर दोनों फिर एक साथ कोर्ट पर उतरेंगे। इतिहास गवाह है कि पेस और भूपति ने मिलकर भारत का कई बार झंडा बुलंद किया है। दोनों का टेनिस कॅरियर काफी लम्बा है। १९९४ से पहली बार एक साथ खेलने वाले पेस-भूपति में अब दरार पड़ चुकी है। उसका सुबूत तब मिला जब ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन ने पहली बार ओलम्पिक के लिए टीम की घोषण करते हुए पेस और भूपति को एक साथ खेलने की बात कही। यहीं से सारा विवाद शुरू हो गया। भूपति ने आनन फानन में पेस के साथ खेलने को मना कर दिया। इसके बाद बयानों का दौर जारी हो गया। हद तब हो गई भूपति ने पेस को धोखेबाज कहते हुए कहा कि पेस ने उनकी पीठ में छुरा भोंका है। विश्व टेनिस पटल पर यह सबसे बड़ा घमासान था। भूपति के साथ-साथ बोपन्ना ने भी पेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और साफ कह दिया कि वह पेस के साथ नहीं खेलेंगे। दूसरी ओर पेस ने भी कड़े तेवर दिखााते हुए कह दिया कि किसी भी जूनियर खिलाड़ी के साथ वह भी नहीं खेलेेंगे। २००२ के बाद से यह जोड़ी कोर्ट पर नहीं उतरी है लेकिन २००६ के एशियन गेम्स में जब दोबारा यह जोड़ी कोर्ट पर उतरी तो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसी दौरान इनकी नाकामी ने इस जोड़ी पर सवाल खड़ा कर दिया था। विश्व युगल रैंकिंग में पेस टॉप टेन में शामिल है जिसके बाद उनका ओलम्पिक में खेलना पहले ही तय हो चुुका था। लेकिन बोपन्ना 12 वें अैर भूपति 14 वें स्थान पर हैं। ऐसे में पेस के साथ भूपति ही को उतराना जायज था।

साभार कैनविज

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