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उत्तर प्रदेश में 2013 में एक महिला के साथ कथित रूप से हुए सामूहिक बलात्कार के संबंध में पुलिस शिकायत में ‘लापरवाही’ बरतने को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने एक जांच दल को मामले का विश्लेषण करने तथा चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।

यह घटना पांच नवंबर, 2013 को फिरोजाबाद में हुई थी और आयोग ने एक महीने बाद इस संबंध में दर्ज शिकायत तथा अखबारों में आयी खबरों पर संज्ञान लिया था। खबरों में कहा गया था कि जिले के एक गांव में कुछ लोगों ने एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया है।

मानवाधिकार आयोग ने आज दावा किया कि पीड़िता के पिता घटना के एक दिन बाद एका पुलिस थाना गए थे, लेकिन पुलिस ने तब ‘प्राथमिकी दर्ज नहीं की’ इलाहाबाद के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक को मामला दर्ज करने का निर्देश दिए जाने के बाद 15 नवंबर, 2013 को प्राथमिकी दर्ज हुई।

पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन पुलिस ने और कोई कार्रवाई नहीं की। क्योंकि इस मामले में मौका-ए-वारदात के अधिकार क्षेत्र को लेकर फिरोजाबाद और मथुरा पुलिस में झगड़ा होता रहा। इस कारण से मामला सही तरीके से दर्ज नहीं हुआ। इसके बजाए, उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीड़िता के ‘चरित्रहनन’ का प्रयास किया। मानवाधिकार आयोग ने एक बयान में दावा किया, उन्होंने न तो आरोपियों को गिरफ्तार किया और न ही उनसे पूछताछ की और इस आधार पर ‘मामला बंद’ कर दिया कि पीड़िता का चरित्र उत्तम नहीं है।

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