article-new_ehow_images_a05_ro_ki_universities-master_s-programs-sports-management-1.1-800x800_0‘खेलोगे, कूदोगे तो बनोगे खराबÓ, आज वक्त ने इस कहावत को नकार दिया है। वह इसलिए क्योंकि अब खेलों के क्षेत्र में भी नौकरियों के बेहतरीन अवसर छुपे हुए हैं। क्रिकेट ही नहीं, दुनिया में सभी तरह के खेलों में पैसा और लोगों की रुचि बढ़ी है। साथ ही, इसमें ग्लैमर भी खूब बढ़ा है। इसलिए मैदान में उतरकर खेलने के अलावा भी दूसरे क्षेत्र या कहें कि खेलों में ही करिअर की असीमित सम्भावनाएं पैदा हुई हैं। उन्हीं में से एक है खेल प्रबंधन। अगर खेल आपका पैशन है तो जरूरी नहीं कि आप खिलाड़ी बनकर ही इसमें करिअर संवार सकते हैं। आपको खेल मैदान से इतर दूसरी गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा। खेल में प्रबंधन और प्रशासनिक गतिविधियों का भी अहम रोल होता है। पश्चिमी देशों में खेल के क्षेत्र में नौकरियां काफी प्रचलित हैं लेकिन भारत में भी इसमें अपार सम्भावनाएं सामने आ रही हैं बता रही हैं पूजा कौशिक
स्पोट्र्स मैनेजमेंट कोर्स खिलाडिय़ों के खेल से हटकर मैच या कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़े हर छोटे-बड़े काम का बेहतर प्रबंधन करना सिखाता है। यह न सिर्फ मनोरंजन बल्कि खेल या उसका प्रबंधन करना भी सिखाता है। विशेष ध्यान इस बात पर रहता है कि कोई भी आयोजन दर्शकों को अपनी ओर खींचे और उसमें ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जाए। स्पोट्र्स मैनेजमेंट प्रबंधन का एक विशेष क्षेत्र है, जहां स्टूडेंट्स खेलों में मार्केटिंग की भूमिका की पहचान करते हैं। इस कोर्स के जरिए स्टूडेंट्स को न सिर्फ स्पोट्र्स की इंटरटेनमेंट वैल्यू बल्कि उसके विविध पहलू क्या-क्या हैं, इससे भी कैंडिडेट्स को रू-ब-रू कराया जाता है। स्पोट्र्स इवेंट का प्रबंधन कैसे करना है और इससे जुड़ी कई चीजें जैसे हेल्थ केयर, तकनीक, उपकरण नैतिक मुद्दे जैसे डोपिंग, पर्यावरण और कानून का अध्ययन करना होता है।
हालांकि विदेशों में एमएससी इन स्पोट्र्स मैनेजमेंट या एमबीए इन स्पोर्ट्स मैनेजमेंट का कोर्स चलन में है। अपने देश में इसको लेकर फिलहाल निजी संस्थानों में शॉर्ट टर्म या सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जा रहे हैं। सरकारी संस्थान इस क्षेत्र में कम ही आगे आ रहे हैं।
स्पोट्र्स मैनेजमेंट के अंतर्गत ब्रांड इंडोर्समेंट, स्पोट्र्स गुड्स प्रमोशन, फैशन गैजेट प्रमोशन, ग्राउंड प्रबंधन, सेलिब्रिटी मैनेजमेंट, स्पोट्र्स एजेंट और स्पोट्र्स टूरिज्म जैसे कई एरिया हैं, जहां ट्रेंड प्रोफेशनल्स का कार्य करना होता है। साथ ही कोचिंग सपोर्ट, प्रबंधन के सिद्धांत, स्पोट्र्स पब्लिक रिलेशन, स्पोट्र्स जर्नलिज्म, वालेंटियर मैनेजमेंट, स्पोट्र्स प्रमोशन, स्पोट्र्स मार्केटिंग, स्पोट्र्स लॉ, बिजनेस प्लानिंग, स्पोट्र्स इवेंट मैनेजमेंट, स्पोट्र्स फाइनेंस, मैनेजमेंट ऑफ स्पोट्र्स, स्पोट्र्स मीडिया, ऑपरेशंस मैनेजमेंट, प्लेयर कांट्रेक्ट्स, ग्लोबल इकोनॉमिक्स ऑफ स्पोट्र्स , स्पॉन्सरशिप, स्पोट्र्स विज्ञापन, ब्रांड एंड इंटरनेशनल स्पोट्र्स मैनेजमेंट जैसे सभी एरिया में काम करना होता है।
डायमेंशन ऑफ प्रोफेशन किसी खेल का आयोजन अपने साथ आंख, नाक, कान, त्वचा और जीभ यानी पांच इंद्रियों से जुड़ा बिजनेस भी साथ लाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आंख यानी मीडिया के जरिए लाखों दर्शकों के बीच प्रसारण होता है। इसमें टीवी, मोबाइल, इंटरनेट और प्रिंट, सब कुछ शामिल है। इसके एवज में अच्छा विज्ञापन हासिल होता है। नाक यानी खेल के आयोजन के दौरान आगंतुकों के बीच तरह-तरह के इत्र का बिजनेस। त्वचा के ब्यूटी प्रोडक्ट्स से जुड़े व्यवसाय और कान यानी, रेडियो से खेल का प्रसारण। इसी तरह जीभ की संतुष्टि को भोजन व्यवसाय से जोड़ा जाता है। अगर कोई खेल हो रहा है तो वहां के आस-पास के लोग जुटते हैं। इनके खाने-पीने का इंतजाम भी एक व्यवसाय देता है। आयोजक खेल के साथ इन व्यवसायों का प्रबंधन भी करता है।
जॉब ऑप्शंस स्पोट्र्स मैनेजमेंट के प्रोफेशनल की मांग आज स्पोट्र्स मैनेजमेंट कम्पनी के साथ ही रियल एस्टेट कम्पनी में भी है। विभिन्न निजी कम्पनियां जो स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के क्षेत्र में आगे आई हैं। वहां भी ब्रांड मैनेजमेंट सम्भालने के लिए ऐसे लोगों की जरूरत पड़ती है। तमाम स्पोट्र्स फेडरेशन भी मैनेजमेंट सेक्शन खोल रहे हैं। कॉरपोरेट हाउस भी ब्रांड एम्बेसडर के लिए फेमस प्लेयर्स को तवज्जो देते हैं। इस कार्य में भी स्पोट्र्स मैनेजर की अहम भूमिका होती है। सैलरी इस कोर्स में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी 25 से 30 हजार तक हो सकती है। अनुभव के साथ ही इसकी कमाई भी बढ़ती चली जाती है।

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