पाकिस्तान की जेल से छूटे सुरजीत सिंह लगातार कोई न कोई ऐसा बयान दे रहे हैं जिससे भारत सरकार मुश्किल में पड़ जाए। वह इस बात पर आमादा हैं कि वह यानी सुरजीत जासूसी करने ही पाकिस्तान गए थे। अब सरजीत यहां तक कह रहे हैं कि वह यह साबित करने के लिए कोर्ट जाएंगे कि भारतीय सेना ने ही उन्हें जासूसी करने के लिए पाकिस्तान भेजा था। गौरतलब है कि पाकिस्तान में 30 साल की सजा काटकर भारत लौटे सुरजीत ने कहा था कि वह पाक जासूसी करने गए थे। भारत सरकार ने सुरजीत के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम की मौजूदगी में गृह सचिव आर. के. सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि हम उनके इस दावे को नहीं मानते। हम इस तरह से किसी की जासूसी नहीं कराते। उन्होंने कहा कि अगर कोई इस तरह का दावा करता है तो वह अपनी अहमियत दिखाने के लिए ऐसा करता है।
सुरजीत का कहना है कि वह भारत सरकार के रुख से बहुत दुखी हैं। उन्हें भारतीय सेना ने ही जासूसी करने के लिए पाकिस्तान भेजा था। यह साबित करने के लिए अब वह कोर्ट जाएंगे। सुरजीत का कहना है कि उनकी अधिकांश जिंदगी पाकिस्तान की जेल में कट चुकी है।
वह अपने परिवार के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाए। सुरजीत ने कहा कि वह न्याय और अपनी पहचान साबित करने के लिए कोर्ट की शरण लेंगे। सुरजीत ने कहा, कोई इस तरह बॉर्डर पार नहीं करता है। कोई उन्हें भेजता है तभी वे जाते हैं। मुझे सेना ने पाकिस्तान भेजा था। सुरजीत सिंह ने दावा किया है कि 1968 में एक बीएसएफ इंस्पेक्टर ने उन्हें लालच देकर जासूसी के काम में शामिल किया था। सुरजीत ने संवाददाताओं को बताया कि मैंने उसकी पेशकश मान ली थी और अहम जानकारियां लाने के लिए 80 से 85 बार पाकिस्तान का दौरा किया। जासूस के तौर पर काम करते हुए मैंने देश के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया और भारतीय अधिकारियों के लिए अहम जानकारियां जुटाईं। सुरजीत ने कहा कि सारे तथ्य जानने के बावजूद, जिस वक्त मैं जेल में था, उस दौरान भारत सरकार ने मेरे या मेरे परिवार के बारे में सोचने की जरूरत नहीं समझी।

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