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जब दिल्ली में पहली बार आप आई थी तो लगा था कि कांग्रेस से ऊब कर लोगों ने भाजपा और आप में विश्वास जताया है। फिर इस्तीफा देने के बाद लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ कूद पडऩा सिर्फ केजरीवाल की महात्वाकांक्षा का विस्तार लगा बस। लेकिन इस बार दिल्ली के चुनाव में केजरीवाल की खांसी का मजाक उड़ाने वालों का दम फूला जा रहा है। दम्भ के महाकुम्भ से निकली मोदी लहर भी दिल्ली में पानी मांग रही है। देश की पहली महिला आईपीएस (माफ कीजिएगा अब यह तमगा भी उनके हाथ से निकलता दिख रहा है) किरण बेदी को अमित शाह सहित भाजपा की सेना बचा नहीं पा रही तभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुद मैदान पर उतरना पड़ा है। इतना ही नहीं मोदी ने विरोधी कंाग्रेस नहीं बल्कि केजरीवाल पर जम कर प्रहार किए हैं। दिल्ली में भाजपा की सरकार बन भी जाए तो भी खांसते खांसते केजरीवाल किरण बेदी से कहीं आगे निकल गए हैं। राजनीति में आम से खास हो गए हैं। दो तिहाई बहुमत से सत्ता में आए मोदी को राजनीति के नौसिखिए मेमने पर दहाडऩा भाजपा की लाचारी दिखा रहा है। केजरीवाल बुरी तरह हारते भी हैं तो भी उनकी हार नहीं होगी। बेदम कांग्रेस के बावजूद मजबूत प्रधानमंत्री को दिल्ली चुनाव में विचलित कर देना ही केजरीवाल की जीत है। नतीजे तो आते रहेंगे सर्वे होते रहेंगे लेकिन केजरीवाल ने दिल् ली भाजपा को बेहाल तो कर दिया है।

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