उच्चतम न्यायालय द्वारा 214 कोयला ब्लाकों का आवंटन रद्द किए जाने के कुछ दिन सरकार ने सोमवार को एक अध्यादेश लाने की कार्यवाही शुरू की जिसके जरिए वह इन खानों का उनकी जमीन और संयंत्र समेत अधिग्रहण कर सकेगी। अधिग्रहण के बाद उनकी नीलामी की जाएगी।

एक सूत्र ने कहा कि अध्यादेश के मसौदे को तैयार किया जा चुका है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित किया जाएगा। यह कदम कोयला ब्लाक आवंटनों के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए किया जा रहा है। इन कोयला ब्लाकों का अधिग्रहण कर सरकार इनकी नीलामी करेगी।

शीर्ष अदालत ने पिछले महीने 1993 से विभिन्न कंपनियों को आवंटित 218 में से 214 कोयला ब्लाकों का आवंटन रद्द कर दिया है। इसके अलावा अदालत ने केंद्र को ऐसे 42 ब्लाकों का परिचालन अपने हाथ में लेने की अनुमति दी है जिनमें कारोबार शुरू हो चुका है। कोयला मंत्रालय ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से गहन विचार विमर्श के बाद अध्यादेश का मसौदा तैयार किया है। सूत्रों ने कहा कि इस मामले में सरकार को जिन मुद्दों को सुलझाना है उनमें कंपनियों की ओर से दी गयी बैंक गारंटी जब्त करने और कंपनियों द्वारा खरीदी गई खानों का मालिकाना खत्म करने का मुद्दा है।

सूत्रों ने बताया कि कोयला ब्लाकों तथा उसकी भूमि व वहां खड़े संयंत्रों की नई नीलामी में सफल बोलीदाताओं को पूर्व के आवंटी को भूमि और संयंत्र की लागत के साथ जमीन की खरीद व संयंत्र लगाने में निवेश की गई राशि पर 12 फीसद सालाना के ब्याज का भुगतान करना होगा।

सूत्रों ने बताया कि जिन भी आवंटियों के कोयला ब्लाक रद्द हुए हैं वे नीलामी में भाग लेने के पात्र होंगे। सिर्फ वे कंपनियां नीलामी में हिस्सा नहीं ले पाएंगी जो कोयला संबंधित मामलों में आरोपी हैं।imagesss

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