kejriwal modiअरविन्द केजरीवाल पर को अंडे फेंके या स्याही पर अरविन्द के कद पर कोई फर्क नहीं पड़ता। केजरीवाल के मैदान में होने से वाराणसी का चुनाव रोचक बन पड़ा है। केजरीवाल ने एक मामले में फिर मोदी को पीछे छोड़ दिया है। केजरीवाल की किताब स्वराज इन दिनों चर्चा में है। वाराणसी में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच उन पर जुड़ी किताबों को लेकर जंग छिड़ गई है। इन दोनों नेताओं से जुड़ी किताबें की लोगों में मांग है। यहां पर 12 मई को चुनाव होना है।
वाराणसी से चुनाव लडऩे का अपने इरादे स्पष्ट करने के बाद लोग मोदी पर लिखी किताबें और केजरीवाल द्वारा लिखी गई एक किताब के बारे में पूछ रहे हैं। बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद मोदी पर लिखी गई किताबें लोकप्रिय हुईंए जबकि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली की सत्ता में आप के आने के बाद केजरीवाल की किताबों की मांग बढ़ गई है। किताब वितरकों का कहना है कि पुस्तकों की मांग के आधार पर केजरीवाल ने मोदी पर बढ़त हासिल कर ली है। इस समयए बाजार में मोदी पर विभिन्न लेखकों द्वारा लिखी गई चार किताबें उपलब्ध हैंए जबकि केजरीवाल की खुद की किताब स्वराज के अलावा उन पर लगभग छह किताबें उपलब्ध हैं। सिंह ने बताया कि अपने किताब स्वराज में केजरीवाल ने भारत में मौजूद वर्तमान लोकतांत्रिक ढांचे पर सवाल उठाया है और भारत के लोग कैसे वास्तविक स्वराज या खुद का शासन हासिल कर सकते हैं, इसके बारे में बताया गया है।

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