गनर लेकर गए छात्र नेता को रोकने से हुआ विवाद

कानपुर : इसे कहते हैं सत्ता की हनक. शिक्षक द्वारा बंदूक ले जाने से रोकने पर हुए विवाद के बाद कोतवाली के सामने सपा से जुड़े छात्र नेताओं ने दिनदहाड़े जमकर उत्पात मचाया। करीब आधा दर्जन शिक्षकों को बुरी तरह पीटा, तीन के सिर फोड़ दिए। बचाव में आई कोतवाली पुलिस से भी सपाई उलझ गए और पथराव शुरू कर दिया। करीब आधा दर्जन कारों के शीशे टूट गए।
सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे छात्र नेता विपिन शुक्ल अपने गनर के साथ डीएवी कॉलेज पहुंचा। वहां चीफ प्रॉक्टर अवधेश सिंह ने उसे हथियार लेकर भीतर जाने से मना किया। इस पर छात्र नेता भड़क गया और शिक्षक से तू-तू, मै-मै करने लगा। बताते हैं कि शिक्षक ने इस पर उसे थप्पड़ मार दिया। विवाद बढ़ गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक देवेश पांडे ने मामला शांत कराया और दोनों पक्षों को बातचीत के लिए कोतवाली बुलाया। तब तक सपा जिलाध्यक्ष चंद्रेश सिंह, मुइन खां, सपा छात्र सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ बाजपेई और सुरेंद्र मोहन अग्रवाल भी वहां पहुंच गए। कोतवाली में ही सपाई और शिक्षकों में दोबारा विवाद शुरू हो गया। मौजूद एसपी सिटी ने मामले को शांत करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। मामला हद से बाहर होते देख एसपी ने सपा छात्र नेताओं को कोतवाली से बाहर निकाल दिया। शिक्षक भी वापस जाने लगे। लेकिन कोतवाली के बाहर पहुंचते ही छात्र नेताओं और उनके समर्थकों ने शिक्षकों को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। पिटाई से तीन शिक्षकों के सिर फूट गए जबकि अन्य घायल हो गए। शिक्षकों ने किसी तरह कोतवाली के भीतर भागकर जान बचाई। चीख-पुकार सुनकर जब एसपी उमेश सिंह व अन्य अधिकारी-पुलिसकर्मी स्थिति को संभालने दौड़े तो उग्र्र सपाइयों ने उन पर भी पथराव शुरू कर दिया। इससे आधा दर्जन गाडिय़ों के शीशे टूट गए। इसके बाद सपा नेता कोतवाली में धरना देने की बात कहकर बैठ गए। बाद में डीआइजी अमिताभ यश ने मौके पर पहुंचकर जैसे-तैसे मामले को शांत कराया। देर रात पुलिस ने हथियार लेकर कॉलेज जाने वाले गनर चंद्रभावन सिंह के खिलाफ धारा 144 के अंतर्गत कार्रवाई की।

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