modi tomerचाणक्य नीति के तहत अन्य दलों में भी कैसे पहुंचे संघ के घुसपैठिए बता रहे हैं मोहित सिंह
आज के दौर में भी राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ ने चाणक्य नीति को संघ ने आज भी अपने बौद्घिक विषय के सबसे पहले अध्याय के साथ -साथ अब भी जोड़ रखा है अंग्रेजी हुकूमत खत्म होने के बाद देश आजाद होने के लिये जो क्रम चला था उसमें भी इस हिन्दु संगठन ने चाणक्य नीति और देश भक्ति को आगे रखकर कम किया । राजनीति के मेले में संघ ने श्यामा प्रसाद मुर्खजी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय ,प्रोफेसर बलराज मधोक जैसी कई और शख्सियतों को लेकर एक ऐसे कट्टïर हिन्दुवादी दल का निर्माण कर उनके हाथों में दीपक देकर जनसंघ का नाम देकर देश के दो टुकडो में बंट जाने के बाद अपने कुछ खास यानि कट्टïर सोच के साथ साथ देश भक्ति का असली जिरहबख्तर पहने कुछ योद्घाओं को कमान सौंपी । इनमे कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने कश्मीर की लड़ाई में खुद को न्योछावर ही नहीं कर दिया बल्कि अपने परिवार और सुख चैन छोडक़र देश भक्ति की परिभाषा अपनी हिम्मत और तटस्था से एक अलग रूप में देश के सम्मुख रखा दिया। कितने ही स्वयसेवकों ने मां भारती के आंचल को बचाने के लिये अपने को न्योछावर कर दिया। लेकिन अपने देश की मिट्टïी को दुश्मनों को छूने तक नहीं दिया । ऐसा उस वक्त हुआ जब कांग्रेसअपने तानेबाने का पंडित नेहरू और महात्मा गांधी और कई और नेता सितार बजा रहे थे। इन कुछ तथा कथित नेताओं की सोच ने एक बार संघ के संस्थापकों को भी पीछे ढकेल दिया। लेकिन संघ संस्थापकों और देशभक्ति के असली रंग में रंगे देशभक्तिों ने अपनी सोच को बरकरार रखा जिसका आगे चलकर जनसंघ के रूप में अपनी सोच को संघ ने साकार रूप देकर देश के परिद्घश्य पर उभार दिया। कांगे्रस में हलचल हुई कांग्रेस ने इसे उसी वक्त एक छोटा नहीं बल्कि उसे कोई खास महत्व नहीं दिया। नेहरू और इंदिरा गांधी अपने स्वाभिमान के खेल में मस्त रहे। लेकिन दूसरी ओर संघ ने अपना कार्यक्रम जारी रखा। हालात बदलते गये और कुछ वर्षों बाद भारतीय जनता पार्टी के नाम से जनसंघ जाना जाने लगा । आज वही जनसंघ और संघ जनसंघ यानि जनमानस का संगठन ने अपने प्रयासों से देश में वर्षो से बरगद रूपी कांग्रेस के वृक्ष की जड़ों तक को हिला डाला ।आज जब 2014 के चुनाव में चन्द दिन बचे हैं ऐसे महत्वपूर्ण दिनों में संघ ने अपनी बौद्घिक क्षमता के बल पर अन्य दलों के दातों में ऐसी खटास भर दी हैकि उनसे अब न निगलते बन रहा है न उगलते। और तो और लगभग हर एक दिन चाणक्य नीति के सहारे आरएसएस सभी दलों को सोचने पर मजबूर कर रहा हैं। संघ की इसी सोच से नरेन्द्र मोदी का पदार्पण हुआ आज मोदी घर घर के नारे ने मूर्त रूप ले लिया है देश में अब मोदी को अगर कुछ लोग पसन्द नहीं भी कर रहे हैं तो उनका विरोध भी नहीं लगभग सभी दलों का दही चख चुकी जनता अब अपना स्वाद बदलना चहा रही है क्योंकि भाजपा विरोधी दलों ने विकास के नाम पर सिर्फ अपने कुनबे और आशियाने का विकास किया । कांगे्रस ने तो देश के जिस्म को ककांल बना दिया। इन्हीं हालातों को देखकर आज अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी कमल रूपी टोपी पहनने को आतुर दिखाई दे रहे हैं। कई ने तो पूर्व में ही मोदी के पीएम उम्मीदवार की घोषणा होते ही नागपुर और झण्डेवालान की चौखट पर खटखटाना शुरू कर दिया था। इनमें कुछ ऐसे भी थे जिन्हें संघ ने अपनी नीति के तहत पहली बार में ही अन्दर प्रवेश दे दिया लेकिन पक्ति में खड़े कुछ को इंतजार करने के लिए बैठा दिया । ऐसे तो लगभग हर एक दिन नये नये करिश्मे देखने को मिल रहे हैं। राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ की चाणक्य नीति ने जो काम कर दिया और जो बौद्घिक कार्य किये जा रहे हैं उससे भाजपा विरोधी दलों में भूचाल आ गया है । गतदिवस गौतमबुद्घ नगर में कांगे्रस प्रत्याशी रमेश सिंह तोमर ने मोदी की लहर से नहीं बल्कि संघ के इशारे और पार्टी से मिले आश्वासन के बाद कांग्रेस का हाथ modi tomerझटककर मोदी की लहर से प्रभावित होने का नाम देकर कमल को खिलाने में जुट गये । ये कांगे्रस के लिए चालीस हजार से ज्यादा के वोल्ट का झटका था और दूसरा झटका गुजरात के गुजराती बन्धु मधुसूदन मिस्त्री ने दिया जिन्होंने मोदी के पोस्टर फाड़ कर कांग्रेस को ऐसे बेरूखे मौसम में गुजरात से तो बिलकुल साफ करने का काम कर डाला इतना ही नहीं मिस्त्री के इस कारनामे से सारे देश में कांग्रेस की तस्वीर पर अभी से हार के छींटे पडऩे लगी इतने बड़े नेता ने ऐसा क्यों किया जिससे कांग्रेस की फजीहत हुई इसको लेकर कांग्रेस हाईकमान में गम्भीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार मिस्त्री के इस कारनामे के पीछे संघ की चाणक्य नीति रही है । जिसमें तोमर और मिस्त्री ने संघ के निर्देशों के अनुसार सही मौके पर कांग्रेस को चोट दी । ऐसा कहा जाता है कि मधु सूधन मिस्त्री भी किसी वक्त में संघ के स्वयं सेवक रहे उन्होंने भी शाखा लगा ध्वज प्रणाम कर भारत माता की वन्दना की और आज भी अंदर ही अंदर संघ का उद्देश्य पूरा करने में लगे हैं। वहीं मोदी से गले मिलने वाले और कांग्रेस को मझधार में छोडऩे वाले तोमर भी संघ और उसकी कार्यशैली से काफी अर्से से बहुत ज्यादा प्रभावित रहे हंै। उन्होंने कांग्रेस का दामन छोडऩे का फैसला बहुत पहले कर लिया था । और किस तरह से कांगे्रस को जोरदार झटका देकर भारतीय जनता पार्टी को अन्य सीटों पर भी लाभ पहुंचाया जा सके इसका भी पूर्व में संघ के रणनीतिकारों से ज्ञान ले लिया था जिसका परिणाम गत 3 मार्च चतुर्थ नवरात्र को देखने को मिला ।

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