modiन्यूजनेटवर्क 24 के लिए मोहित सिंह की विशेष रिपोर्ट
टिकट वितरण को लेकर भाजपा में मचे घमासान के परिणाम स्वरूप नरेन्द्र मोदी के मिशन 2014 में 272 + का मानक160- 170 पर नीचे आने की सम्भावना बलवती हो गई है। यह खुलासा टिकट वितरण के तुरन्त बाद हुए सर्वेक्षणों के आधार पर निकल कर आया है, यह सर्वेक्षण किसी निजी चैनल या एजेन्सी ने नहीं किया है बल्कि स्वयं नरेन्द्र मोदी की विशेष टीम ने अत्यन्त गोपनीय तरीके से किया है और इसमें सबसे ज्यादा चोट उत्तर प्रदेश पर पड़ रही है। सूत्र बताते हैं कि एक महीने पहले कराये गये सर्वेक्षणों में जहां उत्तर प्रदेश में भाजपा को 80 सीटों में से 40 -45 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था। वहीं अब बदले हालातों में भाजपा केवल 20 से 22 सीटों पर सिमट सकती है पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान पूर्वांचल क्षेत्र व राजनाथ सिंह के गृह जनपद में होता दिखाई दे रहा है। आखिर एक माह के अन्दर ऐसा क्या हो गया जो भाजपा का मत प्रतिशत तेजी से गिरा। सूत्र बताते हैं कि अमित शाह ने जो पहली सूची तैयार की थी और संघ ने जिन सीटों पर अपनी मुहर लगायी थी उसमें केन्द्र संसदीय बोर्ड की बैठक में उनमें से कई सीटों को बदल दिया गया। जिसमें डुमरियां गंज, धौराहारा, बाराबंकी ,हाथरस ,बिजनौर,संत कबीर नगर,फैजाबाद, अम्बेडकर नगर , बस्ती , चंदौली ,भदोही और जौनपुर शामिल हैं ये माना जा रहा कि इन सीटों पर उम्मीदवारों को बदलने में करोड़ों का खेल खेला गया है। सबसे चौंकाने वाला मामला डुमरियां गंज का है इस सीट पर प्रबल दावेदार जीपी तिवारी ने आरोप लगाया है कि राष्टï्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस लोकसभा के कांगे्रस सांसद और अब भाजपा प्रत्याशी जगदम्बिका पाल से लम्बा सौदा किया, उधर जगदम्बिका पाल को लेकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्टï्रीय उपाध्यक्ष कल्याण सिंह ने जगदम्बिका पाल का खुलकर विरोध किया था। उनका कहना था कि पूर्व में जिस व्यक्ति के कारण भाजपा की सरकार अपदस्थ हुई उसे पार्टी क्यों गले लगा रही है । उनका साफ तौर पर कहना था कि पार्टी में बैठे कुछ लोग कांग्रेस से दलाली करके भाजपा और विशेष तौर पर नरेन्द्र मोदी को कमजोर करने में तुले हुए हंै। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये सारे तथ्य खुलकर सामने आ चुके हैं तो मोदी मौन क्यों हैं?
उनके खुद के गोपनीय सर्वेक्षण साफतौर पर इस बात का संकेत कर रहे हंै कि मोदी के दिल्ली पहुंचने का रास्ता रोक दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में उनके आंख और कान माने जाने वाले अमित शाह भी संदेह के घेरे में हैं। जबकि मोदी के बारे में यह कहा जाता है कि वह अपने दुश्मनों को नहीं बख्शते हैं तो वह इतनी बड़ी गलती को कैसे बर्दाश्त कर रहे हैं। डुमरियागंज लोक सभा पर इस बार पार्टी ने पूरी तैयारी की थी स्वयं राजनाथ ङ्क्षसह के पुत्र और प्रदेश के महामंत्री पंकज ङ्क्षसह ने सबसे ज्यादा दौरे किये थे और तो और संघ ने भी इस सीट को बेहतर सीटों में चिन्हित किया था यहां से तीन प्रबल दावेदार थे जय प्रताप सिंह , नरेन्द्र मणि त्रिपाठी,जीपी तिवारी इन तीनों का आंकलन किया जाए तो इसमें नरेन्द्र मणि त्रिपाठी सबसे सशक्त उम्मीदवार के रूप में उभर कर सामने आ रहे थे। 2009 के लोक सभा चुनाव में पार्टी ने जयप्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया था वह 80 हजार वोटों से हार गये थे पार्टी ने जो सर्वेक्षण कराया था उसके आधार पर यह तथ्य उभर कर आया था कि यहां से किसी बाह्रïमण उम्मीदवार पर दांव लगाया जा सकता है, इस लोक सभा में बाह्रïमण मतदाताओं की संख्या लगभग 4,00000 लाख है जबकि पाल वोटों की सख्यां 24 हजार है राजनाथ सिंह की पहल पर पटाक्षेप करते हुए जगदम्बिका पाल को पार्टी में शामिल कराकर टिकट उन्हें दे दिया गया क्योंकि कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया था। पाल तो भाजपा के लिए समस्या थे ही लेकिन अब पार्टी के लिए सबसे बड़ी समस्या जयप्रताप सिंह बन गये हंै। ताजा घटनाक्रम के अनुसार कांग्रेस ने भाजपा के विधायक जय प्रताप ङ्क्षसह की पत्नी को डुमरियागंज लोकसभा से टिकट दे दिया है माना जाता है कि जयप्रताप सिंह,राजनाथ सिंह और वसुंधरा राजे के बहुत करीबी हैं अब सवाल उठता है कि ये खेल कैसे और कहां खेला गया क्या इस खेल को अमित शाह की भी मौन स्वीकृति प्राप्त थी यदि ऐसा है तो नरेन्द्र मोदी को बाहर के लोगों से ज्यादा अपनों से खतरा है ठीक इसी तरह से संतकबीर नगर लोकसभा भी विवादों के घेरे में है । संतकबीर नगर से अमित शाह और संघ की सूची में इन्द्रजीत मिश्र का नाम था जबकि राजनाथ ङ्क्षसह रमा पति राम त्रिपाठी के बेटे को देना चाहते थे इस सीट को अंतिम समय तक रोक कर रखा गया लेकिन कल रात में रमा पति राम त्रिपाठी के बेटे शरद त्रिपाठी को टिकट दे ही दिया गया। माना जा रहा है कि अमित शाह ने न चाहते हुए भी स्वीकृति दी। इसके पीछे किसी बड़े खेल की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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