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टेलीकॉम कंपनियों के बीच कॉल दरें घटाने की गलाकाट प्रतियोगिता दूरसंचार उद्योग के लिए ही मुश्किलें पैदा कर रही है. इससे भले ही आम लागों को सस्ती सेवाएं मिल रही हैं, मगर इससे दूरसंचार उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है. ट्राई का तो यही मानना है. ट्राई के चेयरमैन राहुल खुल्लर के अनुसार कंपनियों के बीच चल रही ग्राहकों को लुभाने की यह होड़ तीन से पांच साल में खत्म हो जाएगी. इस अवधि में उद्योग के मुनाफे पर दबाव रहेगा. इसे पूंजी की कमी से भी जूझना पड़ सकता है. इसके बाद हालत में तेजी से सुधार आएगा.

उन्होंने संभावना जताई कि जैसे ही स्थिति सुधरने लगेगी एक समय ऐसा आएगा जब कॉल दरें कम करने की कंपनियों की गला काट प्रवृति आपने आप थम जाएगी. दो साल पहले स्थिति ये थी कि टेलीकॉम कंपनियों का मुख्य लक्ष्य काल दरें कमकर लोगों को अपनी ओर खींचना था. मौजूदा सूरतेहाल यह है कि ऑपरेटर ग्राहकों को लुभाने के लिए मूल्य के बराबर टॉक टाइम मुफ्त में या फिर इससे भी अधिक दे रहे हैं.
ट्राई चेयरमैन ने कहा कि आम तौर पर ग्राहकों को बढ़ी हुई दरों से हो रही परेशानी को कम करने के लिए ऐसे उपाय किए जाते हैं, लेकिन यहां मामला एकदम उलटा है. अगर किसी ऑपरेटर दर को दस पैसे प्रति सेंकेंड कर देता है तो दूसरा पांच पैसे और अगला ऑपरेटर इससे भी आगे बढ़ कर एक पैसा कर देता है. इससे सिथति खराब होती जा रही है. इस तरह की प्रतियोगिता उद्योग को बर्बाद कर रही है. खुल्लर ने सवाल किया कि अगर होड़ में एक दूसरे की हत्या कर दी जाए तो यह कैसी प्रतियोगिता है. इससे किसको लाभ होगा. उन्होंने कहा कि मैदान में बहुत ज्यादा प्रतियोगी होना भी उद्योग के लिए ठीक नहीं है. भारत में कुछ सर्किलों में 12 से 15 प्रतियोगी हो गए हैं.

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