टाउनशिप और मल्टियों में महंगी बिजली का करंट
रहवासियों की लापरवाही और बिल्डरों की होशियारी से टाउनशिप, मल्टियों और नई कॉलोनियों में बिजली का बड़ा ‘खेल’ चल रहा है। करीब 250 टाउनशिप और मल्टियों में बिल्डर के अस्थायी कनेक्शन से घरेलू बिजली जलाई जा रही है। अस्थायी कनेक्शन की बिजली स्थायी की तुलना में करीब दो-तीन गुना महंगी पड़ती है। संपत्ति खरीदते वक्त बिजली व्यवस्था की अनदेखी करने का खामियाजा रहवासी महंगी बिजली खरीदने के रूप में भर रहे हैं। बिल्डर ने बिजली व्यवस्था के नाम पर 50 हजार से एक लाख रुपए तक रहवासियों से लिए हैं। खंडवा रोड, बायपास, राऊ में बसी तमाम टाउनशिप के रहवासियों को बिल्डरों के निजी बिजली बिल मिल रहे हैं।बिल्डर को टाउनशिप विकसित करने के दौरान ही पॉवर हाउस का सेटअप तैयार करना चाहिए, जो वह बसाहट होने तक नहीं करता। खरीदारों से वह बिजली पेटे अलग पैसा लेता है। रहवासी इस बिंदु पर ध्यान नहीं देते।

कॉलोनी में पोल, तार, ट्रांसफॉर्मर, हर घर तक लाइन बिछाने की जवाबदारी बिल्डर की होती है। इसके लिए वह 50 हजार से एक लाख रुपए तक अतिरिक्त लेता है, लेकिन टाउनशिप में कम बसाहट का हवाला देकर पॉवर हाउस विकसित नहीं करता। शुरू में टाउनशिप के मुहाने पर कुछ पोल व तार लगा दिए जाते हैं, ताकि लोग झांसे में प्लॉट या फ्लैट खरीद लें।हर कॉलोनी, टाउनशिप में विद्युतीकरण बिजली कंपनी के सुपर विजन में होता है। खरीदारों को रिझाने के लिए बिल्डर अपने अनुसार ही खंभे लगा लेते हैं, जिसे बिजली अफसर तकनीकी रूप से गलत मानकर अकसर खारिज कर देते हैं लेकिन यह बात खरीदारों को पता नहीं रहती।घरेलू कनेक्शन मिलने पर न्यूनतम 3 रुपए 50 पैसे और 200 से ज्यादा यूनिट खपत वालों को अधिकतम 5 रुपए 10 प्रति यूनिट के मान से बिजली मिलती है।लोगों की मजबूरी यह रहती है कि अगर वो बिजली कंपनी को शिकायत करें तो बिल्डर का कनेक्शन कटने का डर रहता है।बिल्डर के कमर्शियल कनेक्शन से घरों में पहुंचने वाली बिजली 6 से 8 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से पहुंचती है, जबकि बिल्डर को 9 से 12 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से कनेक्शन मिलता है। दो बेडरूम, हॉल, किचन के मकान का औसत बिल बिल्डर ढाई हजार रुपए से ज्यादा वसूलता है।

मात्र तीन हजार रुपए में एक साल के लिए अस्थायी कनेक्शन मिलता है। टाउनशिप में बिजली का सेटअप खड़ा करने के लिए 25 लाख रुपए के लगभग खर्च बैठता है। बिल्डर संपत्ति बिकने के बाद नदारद हो जाते हैं।
सिलीकॉन सिटी के सैकड़ों रहवासी स्थायी कनेक्शन के लिए प्रयासरत हैं। तीन सालों से बिजली की परेशानी झेल रहे हैं।

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