0085_agan (1)लखनऊ। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने यूपी सरकार से 18 मांगों को लेकर इंदिरा भवन के बाहर एक जुट होकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन लोगों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारी कार्यकत्रियों का कहना था कि सरकार को 23 सितंबर तक का समय दिया था। उनका कहना था कि सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई न होने पर वे आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य हो गई है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने चेतावनी दी कि उनका धरना तभी समाप्त होगा जब सरकार उनकी मांगों को मान लेगी।

मंगलवार की सुबह से ही प्रदेश भर से आईं हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्री जवाहर भवन के सामने इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगीं। प्रदर्शनकारियों को देखकर अधिकारियों ने इंदिरा भवन और जवाहर भवन के गेट बंद कारा दिए। इसके चलते ट्रैफिक जाम रहा और ऑफिस जाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की यह भी मांग है कि उनका वेतन 10 हजार प्रतिमाह किया जाए। उन्होंने सरकार से मांग की है की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को अन्य राज्यों की तरह पेंशन योजना का लाभ दिया जाय। समझौते के अनुसार पदोन्नति और चयन के दौरान कोटा निर्धारित किया जाए। मानदेय में हर साल वृद्धि की जाए। दुर्घटना या बीमारी से मौत होने पर बीमे की धनराशि समय से परिवार को दिलाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने यूपी सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी तो यह धरना उग्र रूप ले लेगा। कार्यकत्रियों का आरोप था कि वे अपने हाथ से आंगनबाड़ी केंद्र पर खाना बनाकर बच्चों को खिलाने को वे सिर्फ अपनी ड्यूटी ही नहीं समझती हैं बल्कि मासूम बच्चों को मातृत्व एहसास भी कराती हैं। लेकिन सरकार ने एक ही समय खिचड़ी बांटने का काम एनजीओ को देना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि इससे अंतिम आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचते-पहुंचते खिचड़ी न केवल ठंडी हो जाती बल्कि बेस्वाद भी हो जाती और खाने के काबिल ही नही रहती। ऊपर से अधिकारियों द्वारा उन्हें फर्जी उपस्थिति बनाने के लिए मजबूर किया जाता है।

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