alwela khatri
कभी सोचा नहीं था कि हसी की महफिल जमाने वाला.. जीवन को नए अंदाज में जीने वाला..कवियों की दुनिया का सिरमौर..
कविताओं के आसमां का चमकता सितारा.. अचानक काले बादलों में छिप जायेगा ये सोचा नहीं था। हास्यकवि अलवेला खत्री साहब से मेरी बातचीत फेसबुक पर होती थी। चूंकि मुझे कविता लिखने का शौक था और मैं अक्सर पोस्ट करती रहती थी। अलबेला सर से मेरी बात हमेशा कविताओं में ही होती थी। उन्होंनें मेरी जबाव देने की क्षमता को आंका..और कहा तुम बहुत आगे जाओगी कविता में बस तरासने की जरूरत है थोडा़। मेरे गुरू बन कर मुझमें कविता लिखने का जज्बा जगाया। वे मुझे रोज कविता लिखने का सलीका सिखाते थे। कविता लिखने का गृहकार्य देते और फेसबुक पर बात होने पर उसे चेक किया करते थे। अभी 25 मार्च 2014 को नमस्कार किया और मैं ऑफलाइन हो गई। उसके बाद आज फेसबुक पर उनके निधन की खबर सुन यकिन नहीं हुआ। उस दिन का मैसेज आज पढ़ा उनका लिखा था- क्या हुआ..बेटा भाग गई.. अकेला छोड़ कर। कितना दुखद है कि यह मैसेज मैने आज देखा जब वे खुद चले गए सबको अकेला छोड़ कर।
अलविदा अलबेला
अभी कल की ही तो बात है
जब आपने कहा था कि तुम
तुम मुझे क्यों छोड़ गई अकेला
मैने हंस कर कहा था,
आप महफिल में लगाते हो ठहाको का मेला
अंदाज है आपका अलबेला
क्यों कहते हो खुद को अकेला
क्या मालूम था कि यह होगी आखिरी बात
अब न हो सकेगी मुलाकात
महफिल में कौन रंग जमाएगा
ठहाको का बादशाह बहुत याद आएगा
…अलविदा अलबेला
पूर्ति शर्मा के श्रद्धा सुमन

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