आर्कियोलॉजी की पढ़ाई रोजगार के भरपूर मौके उपलब्ध कराती है। क्या है आर्कियोलॉजी और इसमें करियर की संभावनाएं क्या हैं, इस बारे में बता रही हैं नमिता सिंह

भारत का इतिहास हजारों बहुमूल्य पांडुलिपियों, रिकॉर्डस, अभिलेखों आदि में छिपा हुआ है। इनमें से अधिकांश को वैज्ञानिक मदद से संरक्षित व संगृहीत किया जा चुका है, जबकि असंख्य अभिलेख अभी भविष्य की गर्त में छिपे हुए हैं। अतीत और वर्तमान के रिकॉर्डस की सार-संभाल करना न सिर्फ आवश्यक है, बल्कि धीरे-धीरे यह करियर का रूप लेता जा रहा है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो अतीत की नींव पर खड़े वर्तमान को समझने योग्य बनाता है। इन विरासतों को सहेजना एवं इनके द्वारा दी गई सूचनाओं को जनसामान्य तक पहुंचाना जिन व्यक्तियों के जिम्मे होता है, वे ‘आर्कियोलॉजिस्ट’ कहलाते हैं। इस पूरी विधा को आर्कियोलॉजी कहा जाता है, जबकि इन विरासतों को आर्काइव्स कहा जाता है। इसमें प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों, पत्रों, अखबारों, किताबों, नक्शों, प्लान, फोटोग्राफ्स, डायरी, क्लिपिंग, कानूनी दस्तावेजों, चित्रकारी, फोटोकॉपी आदि का लंबा-चौड़ा संग्रह होता है। धीरे-धीरे इन संग्रहालयों में माइक्रोफिल्म मैटीरियल्स, वीडियो, साउंड रिकार्डिंग और कम्प्यूटर डिस्क का संग्रह भी वृहत रूप लेता जा रहा है। आर्कियोलॉजिस्ट इन्हीं महत्वपूर्ण रिकॉर्डस पर नियंत्रण कर उन्हें सुरक्षित तरीके से रखते हैं।

क्या है आर्कियोलॉजी
आर्कियोलॉजी एक बहुआयामी विज्ञान है, जो भूगोल, इतिहास, रसायन शास्त्र, भू विज्ञान  और साहित्य आदि की मदद से आगे बढ़ता है। इसमें मानव जाति की शारीरिक व सामाजिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। प्राचीन काल के साहित्य एवं सामाजिक घटनाओं पर आर्कियोलॉजी के अध्ययन के जरिए प्रकाश डाला जाता है। यह अध्ययन पर्यावरण संरक्षण, शहरी समाज, टाउन प्लानिंग के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है। खोज से संबंधित यह प्रक्रिया फील्ड टेक्निशियन व लैब टेक्निशियन के काफी काम आती है। एक आर्कियोलॉजिस्ट का मुख्य काम प्रारम्भिक फील्ड वर्क, खनन साइट्स, निकलने वाले सामानों की जांच-पड़ताल से लेकर उन पर होने वाले शोध तक फैला हुआ है। मॉडर्न आर्कियोलॉजिस्ट अपने में पूर्णता लाने के लिए वैज्ञानिक तकनीक व डीएनए एनालिसिस का सहारा ले रहे हैं।

कुछ प्रमुख शाखाएं
आर्कियोजूलॉजी-
इसमें जानवरों व उनसे जुड़े प्रमुख बिन्दुओं जैसे उनके स्वास्थ्य, पालतू बनाने की क्रिया व शिकार के अभ्यास का अध्ययन किया जाता है।
आर्कियोबॉटनी- इसके अंतर्गत पौधों के अवशेष व कृषि क्षेत्र से जुड़े तथ्यों को जानने की कला शामिल है।
आर्कियोमेट्री– इस शाखा में आर्कियोलॉजी के इंजीनियरिंग सिद्धांतों व प्रक्रियाओं का विस्तार से आकलन किया जाता है।
एनवायर्नमेंटल आर्कियोलॉजी- पर्यावरण एवं पूर्व की सभ्यताओं के असर का अध्ययन एनवायर्नमेंटल आर्कियोलॉजी के अंतर्गत किया जाता है।
एक्सपेरिमेंटल आर्कियोलॉजी– प्राचीन प्रतिरूपों व चीजों को काम के दौरान समझने के लिए सही क्रम में लाने की प्रक्रिया इसमें शामिल है।
जियो आर्कियोलॉजी- इसमें भौगोलिक एवं पर्यावरणीय स्थितियों का अध्ययन करने के लिए मिट्टी एवं बालू का अवशेष लेकर अध्ययन करने की प्रक्रिया शामिल है।
मरीन आर्कियोलॉजी- इसमें आर्कियोलॉजिस्ट पानी के अंदर जाकर अवशेषों व अन्य तथ्यों की पड़ताल करते हैं।
अर्बन आर्कियोलॉजी- इसके अंतर्गत शहरी इलाके के बारे में विस्तार से अध्ययन किया जाता है, जो काम के दौरान प्रोफेशनल्स को काफी मदद पहुंचाता है।
प्री हिस्टॉरिक आर्कियोलॉजी-इसमें आर्कियोलॉजिस्ट परंपराओं व प्राचीन रिकॉर्डस का अध्ययन करते हैं।

कब कर सकेंगे कोर्स
आर्कियोलॉजी का कोर्स उन लोगों के लिए है, जिनकी रुचि पुरानी सभ्यता एवं इतिहास जानने में है। इसमें कई तरह के कोर्स मौजूद हैं। बैचलर कोर्स करने के लिए छात्र को बारहवीं कक्षा इतिहास के साथ पास होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएट अथवा डिप्लोमा पाठय़क्रम में प्रवेश आर्कियोलॉजी अथवा इतिहास, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र आदि में बैचलर डिग्री के बाद मिलता है। इसके बाद एमफिल अथवा पीएचडी की राह आसान हो जाती है।

कुछ प्रमुख कोर्स
बीए इन आर्कियोलॉजी
बीएससी इन आर्कियोलॉजी
एमए इन आर्कियोलॉजी
एमएससी इन आर्कियोलॉजी
एमफिल इन आर्कियोलॉजी
पीएचडी इन आर्कियोलॉजी
डिप्लोमा इन आर्कियोलॉजी

आवश्यक स्किल्स
इस कोर्स के अलावा छात्रों के अंदर कई तरह के अतिरिक्त गुण होने भी आवश्यक हैं। किसी भी तथ्य को सूक्ष्मता से समझने, तार्किक गुण, परिश्रम आदि के सहारे वे सफलता के शिखर तक पहुंच सकते हैं। प्रोफेशनल्स को किसी भी प्रोजेक्ट पर प्रयोगशाला में घंटों बिताने पड़ते हैं।
इसमें काम के दौरान शारीरिक कष्ट व तनाव भी मिलता है। प्रोफेशनल्स को इसे ङोलने के अलावा इससे पार पाने का कौशल विकसित करना होगा।

रोजगार की संभावनाएं
म्यूजियम, रिसर्च इंस्टीटय़ूट, यूनिवर्सिटी व आर्काइव्स आदि में रोजगार की भरमार है। साथ ही फॉरेस्ट्री, इन्वॉयर्नमेंटल प्रोटेक्शन, माइनिंग एंड एनर्जी, नेशनल पार्क, हेरिटेज प्लानिंग एवं डेवलपमेंट, आर्कियोलॉजी कंसल्टिंग फर्म आदि में जॉब के अवसर मिलते हैं। अब तो कॉरपोरेट घराने अपने आर्काइव्स सुरक्षित रखने व उनकी देखभाल के लिए आर्कियोलॉजिस्ट नियुक्त करने लगे हैं। स्कूल, कॉलेज व यूनिवर्सिटी आदि में टीचिंग कर किस्मत आजमा सकते हैं। अपने देश के अलावा विदेशों में भी आर्कियोलॉजिस्ट की भारी मांग है।

इन पदों पर मिलेगा काम
आर्कियोलॉजी इंस्ट्रक्टर
कॉन्ट्रैक्ट आर्कियोलॉजिस्ट
हेरिटेज कंजरवेटर्स
ऑनलाइन सर्च स्पेशलिस्ट
आर्कियोलॉजिकल लैब टेक्निशियन
हेरिटेज मैनेजर
रिसर्च असिस्टेंट
आर्कियोलॉजिकल फील्ड डायरेक्टर
क्यूरेटर इन म्यूजियम
रिसर्च आर्कियोलॉजिस्ट
कल्चरल रिसोर्स स्पेशलिस्ट
पार्क रेंजर
कलेक्शन मैनेजर/रिकॉर्ड मैनेजर

आकर्षक सेलरी पैकेज
सरकारी संस्थानों में शुरुआती दौर में प्रोफेशनल्स को 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। दो-तीन साल का अनुभव होने के बाद यह राशि 30-35 हजार तक पहुंच जाती है। कॉलेज/यूनिवर्सिटी में टीचिंग के क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स को आसानी से 30-32 हजार रुपए प्रतिमाह मिल जाते हैं, जबकि विदेशों में मोटा पैकेज मिलता है।008-student-holding-a-skull

प्रमुख संस्थान
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, नई दिल्ली, वेबसाइट-www.asi.nic.in
नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया नई दिल्ली
वेबसाइट-
www.nationalarchives.nic.in
इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च,
नई दिल्ली, वेबसाइट-
  www.ichrindia.org
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
वेबसाइट-
www.bhu.ac.in
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
वेबसाइट
www.kuk.ac.in
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद
वेबसाइट-
www.allduniv.ac.in
अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, चेन्नई
वेबसाइट
www.annamalaiuniversity.ac.in
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली
वेबसाइट-
www.ignou.ac.in
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
वेबसाइट-
www.jnu.ac.in

 

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