नई दिल्ली: आदेश के बावजूद अमरनाथ यात्रा के दौरान हो रही मौतों पर अभी तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर सोमवार को सुप्रीमकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अब तक क्या किया गया, यह जानने में कोर्ट की कोई रुचि नहीं है, हमें यह बताओ कि अभी क्या कदम उठाए गए हैं। ठोस कदम उठाने की बात कहते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि अमरनाथ की तैयारियां बर्फबारी से पहले शुरू की जाएं।

न्यायमूर्ति बीएस चौहान व स्वतंत्र कुमार की पीठ ने अमरनाथ यात्रियों को सुविधाएं मुहैया कराने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार को आधार शिविरों के अलावा अमरनाथ यात्रा के दोनों रास्तों पर भी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने का आदेश दिया।

राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ने पीठ को बताया कि कोर्ट के निर्देश पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो गई है, लेकिन अभी रिपोर्ट पर उच्च स्तरीय समिति ने गौर नहीं किया है, अत: रिपोर्ट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय और दिया जाए। अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इसके लिए छह सप्ताह का समय मांगा। पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए तीन सप्ताह का समय दिया और कहा कि इसके बाद समय नहीं बढ़ाया जाएगा। कोर्ट ने श्राइन बोर्ड से उच्चस्तरीय समिति की बैठक बुला कर प्रारंभिक रिपोर्ट पर गौर करने को कहा।

बोर्ड की ओर से दाखिल सौ से ज्यादा पृष्ठ के हलफनामे पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि हमें इस बात में कोई रुचि नहीं कि पहले क्या किया गया था। पूरे हलफनामे में यही बताया गया है। यह सब महत्वहीन हो चुका है। अब यह बताया जाए कि अभी क्या ठोस कदम उठाए गये हैं या उठाए जाने हैं। कुछ सकारात्मक करके दिखाओ। बर्फबारी शुरू होने से पहले यात्रा तैयारियों का काम शुरू करो।

अमरनाथ यात्रा के दौरान यात्रियों की लगातार होती मौतों से चिंतित सुप्रीमकोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। कोर्ट ने यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था|

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