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पिछले कुछ सालों में इंडिया में चाइनीज प्रोडक्ट्स की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. अब पॉवर सेक्टर में भी भारत को चाइनीज कंपनी की सेवाएं मिलेंगी. ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच यह पहली साझेदारी है. इस संबंध में रिलायंस पावर ने बिजली  परियोजनाओं के विकास और संचालन के लिए चाइना दतांग कॉरपोरेशन के साथ एक समझौता किया है.

अनिल अंबानी की इस कंपनी ने चीनी कंपनी के पूर्ण स्वामित्व वाली चाइना दतांग ओवरसीज इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीडीटीओ) के साथ एक अनुबंध किया है. जिसके अंतर्गत इंडोनेशिया के दक्षिण सुमात्रा में स्थित आरपावर की तीन कोयला खदानों और सहायक आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा. साथ ही भारत और अन्य बाजारों में सीडीटीओ आरपावर के विभिन्न संयंत्रों को संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) की सुविधाएं उपलब्ध कराएगी.
रिलायंस पावर ने एक बयान में कहा है कि यह साझेदारी देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली कंपनी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे चीन और अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से आयातित उपकरणों की बेहतर तरीके से स्थापना और संचालन किया जा सकेगा. वहीं चाइना दतांग ने कहा है कि उसे भारत और इंडोनेशिया जैसे उभरते बाजारों में पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी. इन देशों में कारोबार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं.
आरपावर कोयला, गैस, जल विद्युत और अक्षय ऊर्जा की सबसे ज्यादा परियोजनाओं पर काम कर रही है. फिलहाल कंपनी की मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता 1,540 मेगावाट है. कंपनी के पास देश में निजी क्षेत्र के सबसे ज्यादा करीब दो अरब टन कोयले के कैप्टिव ब्लॉक हैं. फाच्र्यून 500 में शामिल इस कंपनी के पास कुल 83 अरब डॉलर की संपत्तियां हैं.

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