करीब तीन साल पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन से यूपीए सरकार को हिलाकर रख देने वाले प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने आज केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ अपना दो दिवसीय धरना शुरू किया और आरोप लगाया कि मोदी सरकार सिर्फ उद्योगपतियों की हितैषी है। दिल्ली के जंतर-मंतर से 77 साल के गांधीवादी नेता हजारे ने ऐलान किया कि देश भर में पदयात्रा के समापन पर तीन से चार महीनों में स्थानीय रामलीला मैदान से एक जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के मुद्दे पर हजारे ने कहा कि चुनावों के दौरान भाजपा ने अच्छे दिन का वादा किया था पर अच्छे दिन तो सिर्फ उद्योगपतियों के आए हैं। उन्होंने कहा, यह जमीन हड़पने की कोशिश है। ऐसा काम अंग्रेज किया करते थे। आज की सरकार अंग्रेजों के शासन से भी बदतर है। अंग्रेजों ने भी किसानों के साथ इतना अन्याय नहीं किया।
पिछले साल 29 दिसंबर को सरकार ने अध्यादेश लाकर भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए थे जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए पांच क्षेत्रों में किसानों की सहमति प्राप्त करने की धारा को हटाना भी शामिल है। ए पांच क्षेत्र हैं औद्योगिक कॉरीडोर, पीपीपी परियोजनाएं, ग्रामीण आधारभूत ढांचे, सस्ते आवास और रक्षा। हजारे ने कहा, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक जब तक जमीन अधिग्रहित किए जाने वाले गांव के 70 फीसदी किसान सहमति नहीं देते तब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता था। लेकिन इस सरकार ने इस प्रावधान को हटा दिया। यह उद्योगपतियों के फायदे के लिए किया गया। उन्होंने कहा, चुनावों से पहले लोगों को ‘अच्छे दिनÓ के वादे किए गए, उन्होंने विश्वास किया और उन्हें वोट दिया। आज वे किसानों से जबरन उनकी जमीन छीन रहे हैं। इसलिए ‘अच्छे दिनÓ उद्योगपतियों के लिए हैं, न कि आम लोगों के लिए।
अन्यायपूर्ण एवं अलोकतांत्रिक कानून के लिए केंद्र को आड़े हाथ लेते हुए हजारे ने कहा कि अध्यादेश तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि मौजूदा सरकार में जमीन अधिग्रहण पर अध्यादेश लाने के बाद किसान इतनी नाइंसाफी का सामना कर रहे हैं। हजारे ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर वह आम आदमी पार्टी (आप) या कांग्रेस के साथ मंच साझा नहीं करेंगे, लेकिन दोनों पार्टियों का कोई भी सदस्य आम लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा, उन्हें मंच साझा नहीं करने दिया जाएगा क्योंकि यदि मैं उन्हें इसकी इजाजत दूंगा तो यह पार्टी का कार्यक्रम बन जाएगा। वे आम लोगों के साथ शामिल हो सकते हैं। उन्हें कोई नहीं रोकेगा। हजारे ने कहा, 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र का रूप लेकर देश की जनता मालिक बनी थी और सरकार उसकी सेवक बनी थी। पर अब भूमिकाएं बदल गई हैं। सेवक अब मालिक बन गए हैं। इस मौके पर नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि वह देश के हर जिले तक इस आंदोलन को ले जाएंगे। हजारे ने इसे आजादी की दूसरी लड़ाई करार दिया। उन्होंने कहा, आप किसानों की सहमति के बगैर उनकी जमीन कैसे ले सकते हैं? भारत कृषि प्रधान देश है। सरकार को किसानों के बारे में सोचना चाहिए। भूमि अध्यादेश अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा, सरकार किसानों के हितों की उपेक्षा नहीं कर सकती। यह भारत के लोगों की सरकार है न कि इंग्लैंड या अमेरिका की। लोगों ने सरकार बनाई है।
Anna

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.