अरविन्द त्रिपाठी, कानपुर

विगत वर्ष विख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे के आन्दोलनों में देश के साथ सफल कदमताल करने वाले क्रान्ति समर्थक कानपुर शहर के आन्दोलनकारियों में अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल की राहें अलग हो जाने का असर स्पष्ट दिख रहा है. इस असर को उजागर किये बिना सभी आन्दोलनकारियों ने अपने-अपने विचार और क्षमताओं से काम शुरू कर दिया है. आन्दोलन और राजनीति में से चुनाव के मुद्दे पर लम्बे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं में मतभेद स्पष्ट है पर जन-लोकपाल क़ानून के पक्ष में संघर्ष का जज्बा कायम है.
कानपुर शहर में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के झंडाबरदार रहे वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता अशोक जैन अरविन्द केजरीवाल के राजनीतिक दल बनाने के निर्णय पर अन्ना हजारे के अलग हो जाने को सही ठहराते हैं. वे कहते हैं, अपनी तमाम दलीय निष्ठाएं होने के बावजूद लोकपाल की मांग और भ्रष्टाचार के विरोध में चलने वाले आन्दोलन में हम सभी ने खुलकर सहयोग किया था. इस आन्दोलन में युवाओं की भूमिका अति महत्वपूर्ण थी. अगर राजनीतिक दल बनाया अत्यंत आवश्यक था तो इसकी भूमिका बहुत पहले साफ़ कर देनी चाहिए थी. बिना संगठन, बिना राजनैतिक विचारधारा और बिना पार्टी फंड के चुनावों की राह पकडनी ठीक नहीं है. हम सभी इस आन्दोलन में राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए नहीं आये थे. उनकी ही बात को सुरेश त्रिवेदी भी स्वीकारते हैं. श्री त्रिवेदी कहते हैं की हमारे सामने केवल एक चेहरा था, अन्ना हजारे. हम राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनना चाहते. आज राजनीतिक दल चलाने के लिए काला धन अति महत्वपूर्ण भूमिका रखता है. काला धन और भ्रष्टाचार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. ऐसे में राजनीतिक दल को ईमानदारी से चला पाना बहुत कठिन है.
कानपुर के ही योगेश श्रीवास्तव इस समय नई दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के साथ नयी पार्टी के नियम-संविधान को तैयार करवाने में व्यस्त हैं और अरविन्द केजरीवाल के राजनीति में जाने के फैसले के साथ दिखे. उन्होंने सवालिया लहजे पूछा, कीचड़ में उतरे बिना कीचड़ की सफाई का कोई दूसरा तरीका तो है नहीं ? इसलिए इन राजनीतिक दलों के नुमाइंदों को उनके तरीके से ही शिकस्त देने के लिए ये तरीका ज्यादा मुफीद लगता है. किन्तु ज्यादातर युवा कार्यकर्ता इन दोनों शीर्षस्थ लोगों के अलग हो जाने से दुखी और भ्रमित दिखा.
अन्ना आन्दोलन का भ्रष्टाचार विरोध और भ्रष्टाचार के निदान-स्वरूप लोकपाल कानून की मांग से कांग्रेस विरोध फिर सभी राजनीतिक दलों के विरोध में उतरकर राजनीतिक दल बनाने के निर्णय तक के चरणों पर समीक्षात्मक नजर रखने वाले कवि एवं पत्रकार प्रमोद तिवारी, जो खुद भी इस आन्दोलन से अछूते न रह पाए थे, कहते हैं, विभिन्न सोंच और लिप्साओं वाले इस समूह का यही हश्र होना था. राजनीतिक भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले इस व्यवस्था परिवर्तन के संग्राम में एक समूह का राजनीतिक दल बनाना आवश्यक और अनिवार्य होना चाहिये था. गांधी और जयप्रकाश का खुद दलीय और सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं लेना एक घातक कदम था. अन्ना हजारे का इस राजनीतिक दल से अलग होकर आन्दोलन की राह पकड़ लेना भी ठीक कदम है परन्तु उन्हें युवा अरविन्द केजरीवाल को अपने विचारों के संरक्षकत्व फलने-फूलने का अवसर देना चाहिए था. टीम अन्ना और सहयोगियों में सामंजस्य की कमी कई स्तरों पर उजागर हुयी, परन्तु युवा जोश ने सभी कमियों को ढंके रखा. अब टीम अरविन्द को कठिन परिस्थितियों में सामंजस्य बिठाने में कठिनाई अवश्य होगी. जिसका असर आन्दोलन की राह पर चल पड़े अन्ना हजारे पर भी पडेगा.

2 टिप्पणी

  1. Yeh to hona hi tha. Ya yun kahe ki YE SAHI SAMAY PAR SAHI KAM HUA ki Anna je apane aap alag ho gaye. Many Many thanks to God!!! Ab IAC ya phir Arvind Kejhariwal Jee ki bhivi nayee political party aur bhi sasakt aur purn roop se yuwavo ki party ban gayi, jisaki aaj desh ko sabase jayada jaroorat hai aur ek matra vikalp hai. Once again, thanks to God ki ab Arvind Jee ko har ek choti choti decission me baar baar Anna je ke pas nahi jana padega.. Arvind jee aage ka morcha swatantra roop apane pure josh se party aur desh ka netritva kar payenge… waise bhi aaj ke Globalization, Technology aur International level ke vision aur projects ke liye Anna se kahin jayada Arvind jee sahi leader sabit honge. … Doosari or Anna jee Political party me na aa kar unhone apani Izzat kud bacha liya hai, Warna wo bhi Mahatma Ghandhi jee ki tarah Ghandhi jee ki galatiyo ko doharane se bach gaye.

  2. yai jo bhi hua ya ho raha hai bahut hi dukhad hai.koi kahta hai yai sab sochi samjhi baat haai.

    lekin aam aadmi ka kya jinko ek asha thi aandolan sai?anna aur arvind ek dusrai kai viklap hai
    agar koi kahta hai yai right hai or wrong hua iht ok .because as a indian we r free to express our feelings.
    but kahi na kahi thodi jaldbazi ho raho sri kejariwal ki taraf sai.i don”t know why?anna ji nai viklap diya tha na ki atonce ek polotical party bananai ka sandesh……according to me first of all viklap ko samajh kar manthan kar kai ek proper planing karkai proper surver kara kai ek badi team bana kai her society kai logo ko samil karkai specially villeagers (grma sabha) hum log globalization aur technology ki baat to kartai hai lekin lekin apna base 82% people ko jo gaon mai rahtai hai unko bhool jatai hai in sabhi anna aur arvind ka vision batai aur tab ek proper planing kai annaji kai viklap kai saath pary banai.this will take some time atleast 6 mth to one year.
    aur uskai baad anna ji, arvind ji sabhi log saath mai milkar party banai…..its my req to all of us plz plz do not compair in between annaji and arvind ji.dono ka vision ek hai hamarai sapno ka bharat…………jai hind

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