krasahi visvidhyalayaaaजबलपुर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृषि क्षेत्र के विकास को गरीबी से लडऩे का एक प्रभावी साधन बताते हुए आज कृषि विश्वविद्यालयों का पुन: अभिमुखीकरण करनेे तथा अगली कृषि क्रांति शुरू करने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने यहां जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह में कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की कृषि क्षेत्र की सफलता के साथ ही आम आदमी के कल्याण में भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहाकि उनके प्रदर्शन का मापदंड यह है कि वहां से कितने स्नातक निकलते हैं। हमें अपने कृषि संस्थानों से प्रतिबद्ध, सक्षम और कड़ी मेहनत करने वाले पेशेवरों की जरूरत है ताकि अगली कृषि क्रांति की शुरूआत की जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि एक ऐसा क्षेत्र हैं जो कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण है। यह हमारी अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन निर्धारित करता है, खाद्य उपलब्धता एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करता है, ग्रामीण रोजगार का सृजन करता है तथा जमीनी स्तर पर आय में बढ़ोतरी करता है। मुखर्जी ने कहाकि हमारे देश के समक्ष एक बड़ी चुनौती गरीबी और अभाव के अभिशाप को समाप्त करना है। गरीबी का कोई धर्म नहीं होता, भूख का कोई पंथ नहीं होता निराशा का कोई भूगोल नहीं होता। मात्र गरीबी कम करना पर्याप्त नहीं है। गरीबी उन्मूलन से ही भारत विकसित देशों में पहुंचने की घोषणा कर सकता है। उन्होंने कहाकि अध्ययनों से साबित हुआ है कि गैर कृषि क्षेत्र में एक प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कृषि में एक प्रतिशत वृद्धि गरीबी से लडऩे में दो से तीन गुणा अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की क्षमता को साकार करने में कुशल मानव संसाधन का विकास और प्रबंधन महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार का सुझाव दिया कि भारतीय विश्वविद्यालय विश्व के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में स्थान बनाएं। मुखर्जी ने कहाकि प्राचीन समय से ही भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला और नानंदा विश्वविद्यालयों में कृषि की शिक्षा दी जाती थी। यद्यपि पिछले वर्षों के दौरान हम अपनी स्थिति बरकरार नहीं रख पाए। आज हमारे कृषि विश्वविद्यालयों की वैश्विक पहचान नहीं है। उन्होंने शैक्षिक उत्कृष्टता पर जोर देते हुए कहाकि यह हमारी समग्र उच्च शिक्षा प्रणाली का यथार्थ है कि एक भी भारतीय संस्थान विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में होने का दावा नहीं कर सकता।

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