बचपन में चुनाव के दौरान जब भी भाजपा के पोस्टर देखता था तो एक ही बात लिख होती थी वोट अटल को वोट कमल को। पोस्टर में अटल आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी की फोटो बनी होती थी। पिछले लोकसभा चुनाव तक अटल की खड़ाऊं की गूंज लखनऊ से पूरे देश में सुनाई देती थी। लेकिन समय बहुत बेरहम होता है। पहले जोशी पोस्टर से बाहर हुए। फिर आडवाणी को करीने से किनारे किया गया। रही बात अटल की वह तो राजनीति से दूर हैं पर जगदम्बिका पाल को टिकट देकर उनकी व उनके विचारों की ऐसी तैसी कर दी गई। जगदम्बिका पाल के खिलाफ धरने पर बैठ चुके अटल बिहारी वाजपेयी सोच रहे होंगे कि अच्छा है कि वह इस चुनाव से दूर हैं। कुछ दिनों पहले तक लग रहा था कि भाजपा और मोदी ही एकमात्र विकल्प हैं लेकिन अब यह भी अपराधियों भगोड़ों और अवसरवादियों को टिकट देकर अन्य पार्टियों की कतार में खड़ी नजर आती है। दागियों और दूसरी पार्टियों के दगाबाजों से सजी भाजपा अंकल चिप्स के उस पैकेट की तरह नजर आ रही है जिसमें ऊपर से सुदंर पैकजिंग और अंदर चिप्स के कुछ टुकड़े और सिर्फ हवा हवा हवा.. ही है।phooo

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