देवरिया में डीएम एसपी सीएमओ सब बीमार, दो साल में 11 लाख की दवाएं गटकी
यूपी के स्वास्थ्य मंत्री ने किया खुलासा बता रहे हैं राजेश पटेल

लगता है कि देवरिया जिले का पूरा प्रशासनिक तंत्र अप्रैल 2009 से मार्च 2011 तक बीमार ही रहा। बीमारों में डीएम, एसपी, न्यायिक अफसर, डॉक्टर से लेकर एमएलए, एमएलसी सहित अन्य अफसर व पत्रकार भी शामिल रहे। इनके नाम पर देवरिया जिला अस्पताल में जिस तरह से दवाओं की खरीद की गई है, उससे तो दो वर्ष तक सरकारी काम-काज कैसे चला, भगवान ही बता सकता है। दो वर्ष में ये लोग 11 लाख रुपए से ज्यादा की दवाओं को हजम कर गए।
विधान परिषद में ध्रुव कुमार त्रिपाठी के प्रश्न का जो जवाब स्वास्थ्य मंत्री ने दिया है, उसी से इस बीमारी का खुलासा हुआ है। यह बीमारी भी ऐसी-वैसी नहीं रही, एक-दो दिन के अंतराल पर हजारों रुपए की दवाएं खरीदी गई है। सात अप्रैल 2010 को डीएम देवरिया के नाम पर 3148.95 रुपए, फिर 13 अप्रैल को डीएम के ही नाम पर 2650 रुपए की दवाओं की खरीद की गई। 27 अप्रैल को भी 2254.39 रुपए की दवा जिलाधिकारी के नाम पर खरीद ली गई। इसी वर्ष 17 व 25 मई को क्रमश: 5507 तथा 406 रुपए की दवा डीएम खा गए। दो जून को फिर डीएम बीमार हो गए। 3036 रुपए की दवा इनके नाम पर खरीदी गई। 12 अक्टूबर को 1085.99 रुपए की दवा ली। एक फरवरी को 334 रुपए की दवा ली थी कि फिर तीन फरवरी को 1993.85 रुपए की दवा लेनी पड़ी। 17 फरवरी को 949 रुपए, 20 फरवरी को 2020 रुपए की दवा दी गई। पता नहीं क्या बीमारी डीएम को थी कि 26 जुलाई को 1964.50 रुपए की दवा फिर दी गई। 18 जनवरी को भी डीएम को 556.19 रुपए की दवा दी गई। इनकी बीमारी असाध्य लगती है। इसके पहले के वर्ष 2009 में भी आठ सितम्बर को 502 रुपए की दवा ली थी। चार सितम्बर को 262 रुपए की दवा खाए। तीन जनवरी को 617.65 रुपए की, पांच जून को 865 रुपए, 24 जून को 688 रुपए, आठ जुलाई को 733 रुपए, 25 जुलाई को 688 रुपए, एक अप्रैल को 332 रुपए, छह अप्रैल को 138 रुपए, 11 अप्रैल को 1199 रुपए, चार मई को 836 रुपए, 12 मई को 124 रुपए, 13 व 15 मई को मिलाकर 1354 रुपए, 22 मई को 1235 रुपए, चार दिसम्बर को 2176 रुपए, तीन मार्च को 1263 रुपए, 14 मार्च को 584 रुपए, 19 मार्च को 618 रुपए, 27 मार्च को 788 रुपए, 28 मार्च को 89 रुपए तथा 13 मार्च को 724 रुपए की दवा डीएम के नाम पर खरीदी गई।
डीएम के बाद एसपी का स्थान होता है। ये जनाब भी बीमार ही रहे। 2010 में 12 अप्रैल को 1272 रुपए, 27 अप्रैल को 772, 10 जून को 514, 22 जून को 954, 25 जनवरी को 1170, 16 अक्टूबर को 6167, छह जनवरी 2009 को 2137 रुपए, 24 जनवरी को 2190, 29 जनवरी को 704, सात फरवरी को 953, 16 फरवरी को 652, 29 मई को 1598, 23 जुलाई को 1950, 19 अप्रैल को 1167, 12 मई को 1410, सात दिसम्बर को 718, 17 दिसम्बर को 269 रुपए की दवाएं इनके नाम पर खरीदी गईं। एसडीएम सदर के नाम पर 2010 में 13 अप्रैल को 2387 रुपए की दवाएं खरीदी गईं। बीमार होने वालों में डीएम व एसपी ही नहीं, डॉक्टर, सीएमओ व सीएमएस भी रहे। न्यायिक अफसर भी बीमार रहे। एडी गोरखपुर, डीजे देवरिया, एडीजे जेपी सिंह, सीएमएस देवरिया, चीफ फार्मासिस्ट केके सिंह, सीडीओ की पत्नी इंद्रावती प्रताप, आडीडर, सीएमएस की पत्नी, सीएमओ, पत्रकार, डीजे शशिकांत, सीएमओ देवरिया, रेडियोलाजिस्ट केसी राय, डीटीओ रामस्वरूप, पीडी डा. शालीग्राम, आरसीएच अफसर पीएन उपाध्याय, पूर्व सीएमओ आरटी सिंह, चौकीदार, एलडीसी सुधीर कुमार श्रीवास्तव, श्रीराम गुप्ता, एडीजे के भट्टाचार्य, डा. एस चंद्रा की पत्नी मंजू अग्रवाल सहित तमाम अफसर, नेता व पत्रकार ऐसे हैं, जिनके नाम पर इतनी दवाएं इतनी बार ली गई हैं, मानो लगता है कि वह हमेशा बीमार ही रहते हों। यदि यह फर्जीबाड़ा नहीं है तो जाहिर है कि सभी
लगातार बीमार रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन का काम कैसे चलता रहा होगा, यह तो वही बता सकते हैं। इस जिले में दवाओं की ऐसी बंदरबांट हुई है कि गोरखपुर तक के अधिकारियों के नाम पर औषधियों की खरीद हुई है। सीडीओ भी लगातार बीमार ही प्रतीत हो रहे हैं। कुल मिलाकर इस दौरान इन प्रभावशाली लोगों के नाम पर नौ लाख 21 हजार 691 रुपए की दवाएं खरीद ली गईं।

साभार कैनविज टाइम्स

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