sirsa1सिरसा (हरियाणा)
बदलते भारत के साथ गांवों की तस्वीर भी बदल रही है। गांवों में रहने वाले भी अब वक्त की जरूरत को देखते हुए खुद की परंपराओं में सकारात्मक बदलाव के प्रयास कर रहे हैं। मिथक तोड़ रही ऐसी ही है हरियाणा के एक छोटे से गांव दीवानखेड़ा की पंचायत। बरसों से चली आ रही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अब यहां की पंचायत भी खुल कर खड़ी हो गई है।

11 हजार रुपये का सम्मान

महज 1035 की आबादी वाले ने गुरुवार को हुई पंचायत की बैठक में कई बड़े फैसले लिए हैं। इसमें सबसे खास है कि अगर कोई ग्रामीण बहू को बेटी बनाकर, बिना दहेज व बिना घूंघट के लाएगा उसको ग्राम पंचायत 11 हजार रुपये देकर सम्मानित करेगी। बेटी बचाने के लिए कोख में कत्ल करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने जैसा कड़ा प्रस्ताव पारित किया तो बेटी पढ़ाने में असमर्थ परिजनों की सहायता का वचन दिया। इसके साथ ही खिलाड़ियों की पौध तैयार करने, स्वच्छता, पर्यावरण बचाने के लिए भी प्रस्ताव पारित हुए।

गांव के सरकारी स्कूल में हुई ग्राम सभा में पूरा गांव शामिल हुआ। प्रशासन की ओर से एसडीएम संगीता तेत्रवाल, तहसीलदार नौरंग दास, बीडीपीओ वेदपाल सहित, बिजली निगम के एसडीई मोहन लाल, ग्राम सचिव सुभाष सहित अन्य कई विभागों के अधिकारी तथा कर्मचारी भी पंचायत में मौजूद थे। सरपंच सुबेग सिंह ढिल्लों ने पंचायत की ओर से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते प्रस्ताव पारित किए।

पंचायत ने अनूठी तरकीब निकाली
पंचायत ने आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए भी प्रस्ताव बनाया है। लावारिस गाय को संभालने वाले की हरसंभव मदद की जाएगी। घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने के लिए पंचायत ने अनूठी तरकीब निकाली है। घर या गांव में झगड़ा न करने वाले लोगों को पंचायत अपने स्तर पर ही स्वतंत्रता तथा गणतंत्र दिवस पर सम्मानित करेगी।

इस संबंध में सरपंच सुबेग सिंह ढिल्लो ने कहा कि बेशक पंचायत की इनकम कम है। जो प्रस्ताव पारित किए हैं, उनकी पूर्ति के लिए अगर मुझे जेब से खर्च करना पड़ा, तो पीछे नहीं हटूंगा। वहीं, डबवाली की एसडीएम संगीता तेत्रवाल ने पंचायत के फैसलों की जमकर तरीफ की। उन्होंने कहा कि बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण, खिलाड़ियों के लिए पंचायत ने जो प्रस्ताव पारित किए हैं, अन्य पंचायतों को ऐसे प्रस्तावों का अनुसरण करना चाहिए।

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