muslim-womenनई दिल्ली। ट्रीपल तलाक जैसी रीति को मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा से जोड़कर इसका समर्थन मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड करते रहे है। अब ट्रीपल तलाक की मुद्दा समान नागरिक संहिता के विरोध में सामने आ गया है। पर्सनल ला बोर्ड व अन्य मुस्लिम संगठनों ने समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ते कदमों का विरोध करते हुए विधि आयोग की प्रश्नों का बायकाट करने का ऐलान कर दिया है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सवाल-जवाब तैयार करने के पीछे आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये मुसलमानों के खिलाफ है। ये पर्सनल ला को खत्म करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। ला बोर्ड और मुस्लिम संगठन सवाल-जवाब का जवाब नहीं देंगे। बोर्ड ने तीन तलाक और बहुविवाह के बारे में केंद्र सरकार के हलफनामे का भी विरोध करते हुए कहा है कि, सरकार तीन तलाक तथा समान नागरिक संहिता का मुद्दा लोगों का समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए लायी है। समान नागरिक संहिता से लोगों में झगड़ा और विरोध बढ़ेगा।

केंद्र सरकार ने विधि आयोग को इस पर विचार करने का सौंपा है। जिस पर विधि आयोग ने सवाल जवाब जारी कर लोगों से सुझाव मांगे हैं। उधर मुसलमानों में समान्यत तीन तलाक और बहुविवाह पर सुप्रीमकोर्ट में 18 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। जहां केंद्र सरकार हलफनामा दाखिल कर तीन तलाक का विरोध कर चुकी है। पर्सनल ला बोर्ड के महासचिव मोहम्मद वली रहमानी ने दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि समान नागरिक संहिता लाकर सभी को एक रंग में रंगने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक और बहुविवाह पर सरकार की ओर से दिया गया हलफनामा और विधि आयोग द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली दोनों का उद्देश्य समान नागरिक संहिता का रास्ता साफ करना है। मुस्लिम ला बोर्ड ने कहा है कि, वह सरकार और विधि आयोग को साफ कर देना चाहते हैं कि, पर्सनल ला पूरे मुस्लिम समुदाय की आवाज है और वे इसमें किसी तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेंगे। रहमानी ने कहा कि जनसंख्या आंकड़े देखने से पता चलता है कि मुसलमानों से ज्यादा हिन्दुओं में तलाक होते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत विभिन्नता वाला देश है यहां अलग अलग धर्म और समुदाय के लोग अपने अपने रीतिरिवाज मानते हैं यहां समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो सकती। केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जिस अमेरिका की बात करते हैं वहां हर स्टेट में अपना कानून मानने और पहचान बनाए रखने की इजाजत है। इस मामले में अमेरिका का अनुकरण क्यों नहीं किया जाता। देश में विभिन्न संस्कृतियां हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए सरकार बांटने का काम कर रही है। रहमानी ने कहा कि विधि आयोग के 16 सवाल धोखाधड़ी हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड समान नागरिक संहिता के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाएगा।

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