पीएम नरेंद्र मोदी ने को राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर अपनी बात रखते हुए शुरुआत में ही राहुल गांधी पर चुटकी ली। पीएम मोदी ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा कि कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे। धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी। इस दौरान उन्होंने नोटबंदी, बजट, रेल बजट, कालेधन और टैक्स जैसी सभी मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया।

भूकंप के बहाने राहुल पर ली चुटकी
पीएम मोदी ने कहा, कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे। धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी। मोदी के इतना कहते ही अपोजिशन की ओर से हंगामा होने लगा। बता दें कि पिछले सेशन में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं। अगर वे बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा। विरोध कर रहे सांसद कल्याण बनर्जी से मोदी ने कहा, कल्याणजी आपका कल्याण होगा। इसके बाद हंगामा और तेज हो गया।

मोदी ने आगे कहा, आदरणीय अध्यक्षा जी, मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्यों। जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, नम्रता का भाव देखता है तो सिर्फ मां नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है। तब जाकर भूकंप आता है। और इसलिए राष्ट्रपतिजी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्योरा दिया है।

मल्लिकार्जुन खडगे के बहाने आपातकाल का जिक्र
मोदी ने कहा, हम ये जानते हैं कि जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुनजी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्या शेर सुनाया। बहुत बड़ी कृपा की आपने देश पर कि लोकतंत्र बचाया। कितने महान लोग हैं आप। लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भांति जानता है। पूरा लोकतंत्र को आहूत कर दिया गया है। 75 का कालखंड, जब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था। जयप्रकाश बाबू समेत लाखों नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है। लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद यह जनशक्ति का सामर्थ्य था कि लोकतंत्र स्थापित हुआ। ये उस सामर्थ्य की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी प्रधानमंत्री बन सका।

खुद के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी का दिया जवाब
मोदी ने कहा, चंपारण सत्याग्रह शताब्दी का वर्ष है। इतिहास किताबों में रहे तो समाज को प्रेरणा नहीं देता। हर युग में इतिहास को जानने और जीने का प्रयास आवश्यक होता है। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या नहीं थे। औरों के कुत्ते हो सकते हैं। हम कुत्तों वाली परंपरा में पले-बढ़े नहीं हैं। लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे, जब कांग्रेस पार्टी का जन्म नहीं हुआ था। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था। सभी ने मिलकर लड़ा था। सम्प्रदाय की भेद-रेखा नहीं था। तब भी कमल था, आज भी कमल है। बता दें कि कांग्रेस की ओर से मोदी के बारे में कल एक टिप्पणी की गई थी, जिसमें ‘कुत्ते’ शब्द का इस्तेमाल हुआ था। स्पीकर ने यह शब्द कार्यवाही से हटवा दिया था। मोदी ने आगे कहा, हम भले ही उस वक्त नहीं थे, लेकिन हमें देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है।

हमारे एक बार कहने पर लोगों ने छोड़ी सब्सिडी
मोदी ने कहा, शास्त्रीजी की अपनी गरिमा थी। युद्ध के दिन थे। भारत विजय का भाव था। शास्त्रीजी ने अन्न त्यागने की बात कही थी। ज्यादातर सरकारों ने जन सामर्थ्य को पहचानना छोड़ दिया है। लोकतंत्र के लिए यही सबसे बड़ा चिंता का विषय है। मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, वे गैस की सब्सिडी छोड़ दें। 2014 में एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि 9 सिलेंडर देंगे या 12 देंगे। हमने कहा कि अफोर्ड करने वाले सब्सिडी छोड़ दें। सिर्फ कहा था। इस देश के 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आए।

गांधीजी की भी बात कही
प्रधानमंत्री ने कहा, आपमें से कोई ऐसा नहीं है जो आने वाला कल बुरा देखना चाहता है। मैं लाल किले से बोल चुका हूं कि अब तक जितनी सरकारें आईं, जितने प्रधानमंत्री आए, उनका अपना-अपना योगदान रहा है। उस तरफ बैठने वालों के मुंह से यह सुनने को नहीं मिला कि चाफेकर बंधुओं ने कभी कुर्बानी दी, कभी वीर सावरकर ने कालापानी की सजा काटी, कभी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद ने जान दी। उन्हें तो लगता है कि समस्या की जड़ यहां हैं। हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि अमंत्रम् अक्षरं नास्ति। यानी कोई अक्षर ऐसा नहीं होता, जिसे मंत्र में जगह पाने की ताकत ना हो। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसमें समाज में योगदान देने की ताकत ना हो। योजक की जरूरत होती है। इस सरकार ने हर जनशक्ति को जोड़ने का प्रयास किया है।

गांधीजी कहते थे- आजादी से पहले कुछ पाना है तो स्वच्छता पानी है। हम यही बात आपके सामने लेकर आए। क्या कभी संसद में स्वच्छता विषय पर चर्चा तक हुई थी? और इसलिए पहली बार यह सरकार आने के बाद चर्चा हुई। क्या स्वच्छता को भी हम राजनीति के एजेंडे का विषय बनाएंगे?

बजट की तारीख क्यों बदली?
पीएम ने कहा, एक चर्चा यह आई कि बजट जल्दी क्यों पेश किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। कृषि की ज्यादातर स्थिति दीपावली तक पता चल जाती है। हमारे देश की कठिनाई है कि अंग्रेजों की छोड़ी विरासत को लेकर चल रहे हैं। हम मई में बजट की प्रक्रिया से पार निकलते हैं। एक जून के बाद बारिश आती है। तीन महीने बजट का इस्तेमाल नहीं हो पाता। काम करने का समय कब बचता है। जब समय आता है तो दिसंबर से मार्च तक जल्दबाजी में काम होते हैं। बजट पहले शाम 5 बजे पेश होता था। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि यूके के टाइम के हिसाब से अंग्रेज यहां बजट पेश करते थे। घड़ी उल्टी पकड़ते हैं तो लंदन का टाइम दिखता है। ऐसा इसलिए दिखाया क्योंकि कई लोगों को कई चीजें समझ नहीं आतीं। मोदी की इस बात पर कांग्रेस के सदस्य भी हंसने लगे।

मोदी ने आगे कहा, जब अटलजी की सरकार आई तो समय बदला गया। जब आपकी (यूपीए) सरकार थी तो आपने भी कमेटी बनाई थी। आप भी चाहते थे कि वक्त बदलना चाहिए। आपके वक्त के प्रपोजल को ही हमने पकड़ा। आप नहीं कर पाए। आपकी प्रायाेरिटी अलग थी। आपको बड़े गर्व से कहना चाहिए। फायदा उठाइए ना कि ये हमारे समय हुआ था। रेलवे में भी एक बात समझें कि 90 साल पहले जब रेल बजट आता था, तब ट्रांसपोर्टेशन का मोड रेलवे ही था। आज ट्रांसपोर्टेशन बड़ी अनिवार्यता है। इसके कई मोड हैं। इसलिए मुख्यधारा में रेलवे व्यवस्था रहेगी। लेकिन सोचने के लिए सरकार ने कॉम्प्रिहेंसिव तरीके से सोचा है। पहले बजट में गौड़ाजी ने बताया था कि करीब 1500 घोषणाएं हुई थीं। लोगों को खुश रखने के लिए एलान होते थे। 1500 घोषणाओं को कागज पर ही मोक्ष प्राप्त हो गया था। ऐसी चीजें ब्यूरोक्रेसी को सूट करती थीं। हमने ये बंद किया।

बेनामी संपत्ति का फिर जिक्र किया
– मोदी ने कहा, हमारे खडगे जी ने कहा कि कालाधन हीरे-जवाहरात, सोने-चांदी और प्रॉपर्टी में है। मैं आपकी बात से सहमत हूं। लेकिन ये सदन जानता चाहता है कि ये ज्ञान आपको कब हुआ? क्योंकि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि भ्रष्टाचार की शुरुआत नगद से होती थी। परिणाम में प्रॉपर्टी-ज्वेलरी होती है। जरा बताइए कि 1988 में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे। पंडित नेहरू से भी ज्यादा बहुमत दोनों सदनों में आपके पास था। पंचायत से पार्लियामेंट में सबकुछ आपके कब्जे था। 1988 में आपने बेनामी संपत्ति का कानून बनाया। आपको जो ज्ञान आज हुआ है, क्या कारण था कि 26 साल तक उस कानून को नोटिफाई नहीं किया गया। क्यों उसे दबोच कर रखा गया। तब नोटिफाई कर देते थे तो 26 साल पहले स्थिति ठीक थी। देश को साफ-सुथरा करने में योगदान हो जाता। वो कौन लोग थे, जिन्हें कानून बनने के बाद लगा कि इससे तो नुकसान हो जाएगा। आपको देश को जवाब देना पड़ेगा। हमने कानून बनाया है। मैं आज इस सदन के जरिए देशवासियों को कहना चाहता हूं कि आप कितने ही बड़े क्यों ना हो, गरीब के हक का आपको लौटाना पड़ेगा। मैं इस रास्ते से पीछे लौटने वाला नहीं हूं। इस देश में प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन की कमी नहीं थी, लेकिन एक ऐसा वर्ग पनपा जो लोगों का हक लूटता रहा। इसलिए देश ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया।

कांग्रेस और भगवंत मान पर चुटकी
उन्होंने ने कहा, एक समानांतर अर्थव्यवस्था बनी थी। ये बात भी आपके (कांग्रेस) संज्ञान में थी। जब इंदिराजी थीं, तब यशवंतराव चह्वाण उनके पास गए थे। तब इंदिराजी ने कहा था कि चुनाव नहीं लड़ना है क्या। आपका निर्णय गलत नहीं था, लेकिन आपको चुनाव का डर था। आपने कैसे देश चलाया? मोदी ने कहा, चार्वाक का सिद्धांत विपक्ष ने मान लिया। वे कहते थे- ‘यावत जीवेत, सुखम जीवेत। ऋणम कृत्वा, घृतम पीवेत’। यानी जब तक जियो, सुख से जियो। उस समय ऋषियों ने घी पीने की बात कही थी। शायद उस वक्त भगवंत मान नहीं थे। नहीं तो कुछ और पीने को कहते।

मोदी ने कहा, एक समय था, जब देश में इनकम टैक्स अधिकारी मनमर्जी से जाकर धमकते थे। नोटबंदी के बाद सारी चीजें रिकॉर्ड पर हैं। कहां से आया, किसने लाया, कहां रखा। अब उसमें से टॉप नामों को डाटा माइनिंग के जरिए निकाले गए हैं। अब इनकम टैक्स अधिकारी को सिर्फ एसएमएस करके पूछना है। बिना अफसरशाही के अब लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। यह क्लीन इंडिया का प्रयास है। बेनामी संपत्ति का कानून पास होकर नोटिफाई हो चुका है। जो भी सुन रहे हैं, वो भी समझें और प्रावधान पढ़ लें कि कितना कठोर कानून है। मेरा सभी से आग्रह है कि आगे आइए और देश का भला करने के लिए कॉन्ट्रिब्यूट कीजिए। जिस दिन हमारी सरकार बनी, हमने सबसे पहले कालेधन के खिलाफ SIT बनाई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह बनाई। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च 2014 को कहा था कि 1947 के बाद 65 साल से किसी ने विदेशों से कालाधन लाने की नहीं सोची। सरकारें विफल रही हैं। तीन साल से आपने (यूपीए) कमेटी नहीं बनाई। आपने कुछ नहीं किया।

नोटबंदी से ज्यादा मनरेगा में बदले नियम
जब हमने कहा कि 2 लाख से ज्यादा की ज्वेलरी खरीदने पर पैन नंबर देना होगा। मैं हैरान हूं कि कालेधन के खिलाफ भाषण देने वाले लोग मुझे चिट्ठियां लिखते रहे कि ये फैसला वापस लीजिए। मैं जानता हूं कि इससे कठिनाई हुई होगी, लेकिन देश के लिए यह जरूरी थी। हमने इनकम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम भी लाई। अब तक का सबसे ज्यादा पैसा इसमें डिक्लेयर हुआ। हमने 1100 से ज्यादा पुराने कानून खत्म किए। लेकिन यहां कहा गया कि आपने नोटबंदी में बार-बार नियम बदले। ये तो ऐसा काम था जिसमें हम जनता की तकलीफ तुरंत समझने के बाद रास्ता खोजना पड़ा था। एकतरफ देश को लूटने वाले थे, दूसरी तरफ देश को ईमानदारी के रास्ते पर लाने वाले थे। लेकिन आप लोगों का जो बड़ा प्रिय कार्यक्रम है, उस पर आप पीठ थपथपा रहे हैं। देश आजाद होने के बाद 9 अलग-अलग नाम से योजना चली। आज उसे मनरेगा कहते हैं। देश और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इतने साल से चली योजना के बावजूद मनरेगा में 1035 बार नियम बदले गए। उसमें तो कोई लड़ाई नहीं थी। मनरेगा में भी क्यों 1035 बार परिवर्तन करने पड़े। एक्ट तो एक बार बन गया था। नियम बदले गए। काका हाथरसी की कविता के शब्द सुनाता हूं। इसे यूपी के चुनाव से ना जोड़ें। काका हाथरसी ने कहा था- अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट, मिल जाएगी आपको बिल्कुल सत्य रिपोर्ट।

नोटबंदी का फैसला सही वक्त पर लिया
मोदी ने कहा, कई लोग सोच रहे थे मैंने यह फैसला इस वक्त क्यों लिया? मैं बताता हूं? उस हमारी इकोनॉमी मजबूत थी। कारोबार के लिए भी वक्त वक्त सही था। हमारे देश में सालभर में जितना व्यापार होता है उसका आधा दिवाली के समय ही हो जाता है। यह सही समय था नोटबंदी के लिए। जो सरकार ने सोचा था लगभग उसी हिसाब से सब चीजें चलीं। मैंने जो हिसाब-किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है। इसलिए मैं बताता दूं कि यह फैसला मैं हड़बड़ी में नहीं लिया।

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