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न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फैसले की परिपक्वता की तारीफ की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान में कश्मीर विवाद के कारण बढ़ी टेंशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती है।

उत्तेजित हैं भारतीय नागरिक
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी इस इलाके में शांति चाहते हैं और उनका ध्यान इंडियन इकॉनमी को पटरी पर लाना है। हालांकि भारतीय नागरिक उत्तेजित हैं और चाहते हैं कि पाकिस्तान के उकसावे को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। कश्मीर में आतंकियों ने इंडियन आर्मी बेस पर हमला कर 18 सैनिकों को मार दिया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच टेंशन चरम पर है। दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच युद्ध की आशंका जताई जाने लगी।

हाल के दशकों में दोनों देशों के बीच तीन युद्ध हो चुके हैं। दोनों देशों के बीच उपजे से इस हालात से न केवल आर्थिक विकास पर संकट मंडराने लगा है, बल्कि परमाणु युद्ध में भी फिसलने की आशंका जताई जा रही है। “Shooting for a Century: The India-Pakistan Conundrum” के लेखक स्टीफन पी. कोअन ने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव पर न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, ‘ऐसा हो सकता है और ऐसा हुआ तो दोनों देशों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।’

कर्नेगी एन्डाउन्मेंट फोर इंटरनैशनल पीस के एक सीनियर असोशिएट एश्ले जे टेलिस ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, ‘मैं सोचता हूं मोदी के पास इसे सुलझाने के लिए राजनीतिक क्षमता है। मोदी के साथ दो सकारात्मक चीजें हैं- उनकी भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में बहुमत में है। ऐसे में वह कोई भी साहसिक और प्रासंगिक कदम उठाने में सक्षम हैं। दूसरी बात यह कि मोदी की पार्टी मजबूत हिन्दू राष्ट्रवादी है और उन्हें किसी भी तरह के तुष्टीकरण का आरोप नहीं झेलना होगा। मोदी को रिस्क उठाने की इजाजत होगी। जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा है।’

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