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कानपुर। काला धन सफेद करने की घोषणा में कानपुर टॉप पर है। इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (आईडीएस) में सोमवार तक कानपुर के कारोबारी 1150 करोड़ रुपये से ज्यादा की अघोषित कमाई को सफेद कर चुके हैं। वित्त मंत्रालय भी कानपुर से मिल रहे आंकड़ों से उत्साहित है। वहीं, अगर कानपुर रीजन (पश्चिम यूपी और उत्तराखंड शामिल) की बात करें तो अब तक यहां 1800 करोड़ रुपए से ज्यादा की अघोषित कमाई सरेंडर की जा चुकी है। खास बात यह है कि इसमें 60 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी सिर्फ शहर की है। रोजाना लगभग 450 से ज्यादा सूचनाएं मिल रहीं हैं।
एक जून को चालू इस स्कीम में शुरुआत में काफी हल्का रिस्पॉन्स मिला था, लेकिन जैसे-जैसे आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, अधिकारियों की व्यस्तता बढ़ती जा रही है। देश में सबसे ज्यादा घोषणा करने वाले शीर्ष पांच रीजन कानपुर भी शामिल है। जबकि मुंबई रीजन टॉप है, इसके बाद दिल्ली, गुजरात और फिर कानपुर है।
कानपुर से मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स को देखते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी कानपुर पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं। वित्त मंत्रालय और सीबीडीटी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग रोजाना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रगति का ब्योरा लिया जा रहा है। आयकर विभाग को उम्मीद है कि तीस सितंबर तक कानपुर शहर से 2000 करोड़ रुपये इस स्कीम में सामने आ सकते हैं। वहीं, अंतिम तारीख के बाद विभाग कर चोरों पर शिकंजा कसने की तैयारी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग के पास ठोस सूचनाओं का डाटा तैयार हो गया है। इस डाटा बैंक में 60 हजार से ज्यादा लोगों की कमाई-खर्च-निवेश का ब्योरा मौजूद है। इसमें पिछले एक साल में हुई जमीनों की खरीद बिक्री के रिकॉर्ड जुटाए गए हैं। डीएम सर्किल रेट और वास्तविक मूल्य का मूल्याकंन आयकर विभाग अपने स्तर से करा रहा है। इन सूचनाओं को युद्धस्तर पर फिल्टर किया जा रहा है। तीस तक का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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