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दो दिन की छाई धुंध के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने पर जहां वैज्ञानिकों ने चिंता जताई वहीं कोर्ट ने भी सख्त रुख जताया है। उत्तर प्रदेश के कई भागों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बाद मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस बारे में प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों समेत सरकार के अफसरों को तलब किया। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि कागजी कार्रवाई करने के बजाए वह यह बताएं कि फौरन इस पर काबू पाने के लिए कौन से उपाय किए जा सकते हैं। हाई कोर्ट ने इस बारे में प्रभावी उपाय पेश करने के लिए यूपी सरकार को बुधवार को फिर से बुलाया।
प्रदूषण पर सरकार हुई सख्त
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाकर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सडक़ों पर सफाई के बाद अगर धूल उठे तो पानी का छिडक़ाव किया जाए। 2 दिन के लिए स्टोन क्रशर और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मिट्टी की खुदाई पर रोक लगाई जाए। राज्य प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को प्रदूषण की स्थिति में मामूली सुधार तो हुआ लेकिन अभी भी स्थिति खतरनाक बनी हुई है।
उधर दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए कदम ना उठाने को लेकर मंगलवार को दिल् ली और अन्य पड़ोसी राज्यों को लगाई। एनजीटी ने वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए उन्हें बुधवार तक उसके निर्देशों के कार्यान्वयन की खातिर पूरे तंत्र की जानकारी देने का निर्देश दिया। एनजीटी के प्रमुख न्यायमूर्ति स्वंतत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने फसल जलाने एवं वायु प्रदूषण को रोकने से जुड़े अपने आदेशों का पालन न करने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई।

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