तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद, कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को केंद्र से उन किसानों के परिजनों को 25 लाख रुपये देने का आग्रह किया, जो कानूनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए मारे गए थे. उन्होंने कहा, यह लोकतंत्र का परिणाम है. तानाशाह कितना भी मजबूत क्यों न हो, उसे आखिरकार लोकतंत्र में लोगों के सामने झुकना होगा. किसानों के लिए स्वतंत्रता.
सिद्धारमैया ने किसानों को न्याय देने की बात पर जोर देते हुए कहा, ‘अब जब बीजेपी को अपनी गलती का एहसास हो गया है और किसान विरोधी कानूनों को वापस ले लिया है. यह संघर्ष के दौरान शहीद हुए किसानों को न्याय देने का समय आ गया है. मैं प्रधानमंत्री से मृतक किसानों को 25 लाख रुपये की घोषणा करने का आग्रह करता हूं. किसानों को आखिरकार आजादी मिली है.’ सिद्धारमैया ने ट्वीट करके ये बात कही.
साल 1955 के इस कानून में किया गया था संशोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों (Three Farm Laws) को वापस लेने का ऐलान किया. कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल नवंबर से ही आंदोलन कर रहे थे.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद किसानों ने शुक्रवार को गाजीपुर सीमा पर ‘किसान एकता जिंदाबाद’ के नारों के साथ जश्न मनाया. प्रधानमंत्री ने गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की और कहा कि इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा. प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़े मुद्दों पर एक समिति बनाने की भी घोषणा की.
इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान किया गया था. ऐसा माना जा रहा था कि इस कानून के प्रावधानों से किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा, क्योंकि बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी. बता दें कि साल 1955 के इस कानून में संशोधन किया गया था. इस कानून का मुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए उनके उत्पादन, सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित रखना था.
इस कानून के तहत किसान एपीएमसी यानी कृषि उत्पाद विपणन समिति के बाहर भी अपने उत्पाद बेच सकते थे. इस कानून के तहत बताया गया था कि देश में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जाएगा, जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी के बाहर फसल बेचने का आजादी होगी. प्रावधान के तहत राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई थी.

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