दिल्ली –  मोदी सरकार केमिकल वाली खाद छोड़कर जैविक खाद का इस्तेमाल करने की अपील कर रही है। सरकार इसके लिए बनाई गई स्कीम PKVY के तहत प्राकृतिक खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये दे रही है, लेकिन हरियाणा ने ऐसी खेती में इस्तेमाल होने वाले बायो फर्टिलाइजर की बिक्री पर रोक लगा दी है। वजह इसे बनाने वाली कंपनियों का रजिस्टर्ड नहीं होना है। यह फैसला किसानों के हक में लिया गया है, ताकि वे कहीं आर्गेनिक कंपोस्ट के नाम पर कुछ और न खरीद बैठें।

हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को गाइडलाइन जारी करने के आदेश दिए थे। उसके बाद सरकार ने 16 अगस्त को कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया, लेकिन किसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। फिर क्या था एग्रीकल्चर कमिश्नर ने सभी बायो फर्टिलाइजर की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी। खाद विक्रेता केवल उन्हीं कंपनियों के बायो फर्टिलाइजर बेचेंगे, जिनका रजिस्ट्रेशन एग्रीकल्चर डायरेक्टर के यहां होगा। इसके सबूत के तौर पर रजिस्ट्रेशन की फोटो कॉपी दुकान पर लगानी होगी।

कृषि  विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि खाद की दुकानों पर तत्काल छापामारी करने के आदेश कृषि आयुक्त ने दिए हैं। ताकि रजिस्टर्ड कंपनी का ही प्रोडक्ट इस्तेमाल हो। सोनीपत में कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने उर्वरक विक्रेताओं की बैठक लेकर बायो उर्वरक की बिक्री न करने के आदेश दिए. एकाएक रोक लगने से उर्वरक विक्रेताओं में हड़कंप मचा हुआ है।

रिपोर्ट – न्यूज नेटवर्क 24

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