रोहित तिवारी:
दो साल पहले मुंबई के धारावी में होली खेलने के बाद अचानक दो सौ से अधिक लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उन्हें सायन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दो दिन के इलाज के बाद डॉक्टरों को पता चला कि इन लोगों को सेंथेटिक कलर्स प्वॉइजनिंग (रंग विष बाधा) हुई है। क्योंकि अधिकतर मरीजों ने खाना खाने के बाद उल्टियां करना शुरू कर दिया था।
कहां से आते हैं ये कलर्स-
हर्षोउल्लास से मनाए जाने वाले होली के इस त्योहार में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक या नकली रंगों का प्रयोग हो रहा है। इसका मनुष्य के शरीर पर घातक असर पड़ता है। मुंबई के मस्जिद बंदर इलाके में सिंथेटिक रंगों के कारोबार में हर साल हजारों टन सिंथेटिक रंग बेचते हैं। ये सिंथेटिक रंग मुंबई में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कोलकाता से लाया जाता है। मुंबई के धारावी और कुर्ला की झोपड़पट्टियों में भी इसका अधिक मात्रा में उत्पादन होता है। इस तरह से हर साल रंगों की मांग में 20 फीसदी बढ़ोतरी हो रही है।
सिंथेटिक रंगों से रहें दूर
अपना नाम न छापने के अनुरोध के साथ एक कलर विक्रेता ने बताया कि एक जमाना था, जब वे हल्दी, पलाश और फूलों के रस से बने प्राकृतिक रंग बेचा करते थे, लेकिन अब इस तरह के रंग कम ही बनते हैं। इसके अलावा कपड़ा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले डाई के रंगों से मिलते-जुलते सिंथेटिक रंग बाजार में बड़े पैमाने पर सस्ते दरों पर उपलब्ध होने के कारण हर कोई इसे ही बेचना आसान समझता है। इन रंगों में टॉक्सीन के साथ ही घातक पदार्थ अधिक मात्रा में मिले होने के कारण शरीर के कोमल त्वचा जैसे बालों की जड़, गाल, आंखों में ये खतरनाक रंग जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसलिए पाठकों को यह सलाह दी जाती है कि वे होली के इन खतरनाक रंगों से दूर ही रहें।

हरा रंग-
यह रंग कॉपर सल्फेट से बनाया जाता है, जो आंख के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आंख में ज्यादा मात्रा में जाने से लोग अंधेपन का शिकार हो सकते हैं।

सिल्वर रंग-
एल्यूमीनियम ब्रोमाइड से बनने वाले इस कलर से आंख की नेत्र ज्योति जाने का खतरा अधिक है।

नीला/बैगनी रंग-
ये रंग क्रोमियम आयोडाइड से बनता है। इससे सांस लेने की तकलीफ तेज हो सकती है। अस्थमा रोगियों के लिए यह रंग जानलेवा साबित हो सकता है।
holi æ×
लाल रंग-
मरक्यूरी सल्फेट से बनने वाले इस रंग से त्वचा का कैंसर और मानसिक रोग होने का खतरा अधिक रहता है।

जल रंग-
अल्कलाइन से बना यह रंग सूखे और पेस्ट के रूप में मिलता है। इसके काले रंग में इंजन आॅयल मिला रहता है। यह आंख, त्वचा पर खतरनाक असर डालता है। पानी में घुलनशील इन रंगों का प्रयोग बच्चे ज्यादा करते हैं। उनकी मुलायम त्वचा पर इसका घातक असर पड़ सकता है।

Deputy News Editor
“Dainik Dabang Dunia”, Mumbai

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.