पैरों का निचला हिस्सा काटे जाने के 40 प्रतिशत से ज्यादा मामले डायबिटीज रोगियों के होते हैं। विशेष रूप से डिजाइन ऑथरेटिक्स और इनसोल वाले बेहतर फुट वियर डायबिटीज की स्थिति में पैरों को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं। डायबिटीज के रोगियों के पैरों के स्वास्थ्य और देखभाल के बारे में बता रहे हैं सीपीओ के क्लिनिकल निदेशक अमित भंती

लाइफ स्टाइल से जुड़े रोगों के बढ़ते मामले आजकल चर्चा के विषय बन गए हैं। कार्डियोवैस्क्यूलर रोगों और हाइपरटेंशन के अलावा डायबिटीज जैसे रोग इस चर्चा के मुख्य विषय बन गए हैं। इंसुलिन डिसऑर्डर के बढ़ते मामले, इसके मायने और इसके परिणामस्वरूप सेहत के खतरे आने वाले वर्षों में देश के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकते हैं। जब भी हम डायबिटीज नियंत्रण की बात करते हैं तो सिर्फ ब्लड ग्लूकोज लेवल संतुलित रखने, शारीरिक गतिविधियां बरकरार रखने और शरीर का वजन नियंत्रित रखने की जरूरत पर ही जोर दिया जाता है। इस बात पर जोर देने के लिए कोई चर्चा और वक्त नहीं दिया जाता कि यह बीमारी पैरों के क्षतिग्रस्त होने का बड़ा कारण बनती है।

डायबिटिक फुट
डायबिटिक फुट की समस्या भी डायबिटीज के कारण ही उत्पन्न होती है। डायबिटीज पीडित किसी व्यक्ति में यदि पैरों के संक्रमण, अल्सर, घाव और न्यूरोपैथी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं तो इस समस्या को डायबिटिक फुट कहा जाता है।

इसमें क्या होता है
इसमें न्यूरोपैथी यानी नसों के क्षतिग्रस्त होने के कारण संवेदनशीलता खत्म हो जाती है। इस वजह से पीडित व्यक्ति को त्वचा में होने वाले जख्म का पता भी नहीं चल पाता। नसों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई बार पांव या अंगूठों के आकार में भी बदलाव आ सकता है। आपके पैर की त्वचा भी डायबिटीज के कारण प्रभावित हो सकती है। यह शुष्क हो सकती है या इसमें बिवाई पड़ सकती है। इस वजह से भी संक्रमण हो सकता है। गंभीर मामलों में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पैर काटने (एंपुटेशन) तक की नौबत आ जाती है ताकि गैंगरीन के जख्मों से पूरे शरीर में जहर फैलने न पाए।

सतर्क रहें
पैरों की सेहत दुरुस्त रखने, किसी तरह की गडबडियों के प्रति सतर्क रहने और फुट इनसोल्स जैसे ऑथरेटिक उपकरणों के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान देने से लंबे समय तक डायबिटीज के कारण पैरों के क्षतिग्रस्त होने के मामलों में कमी लाई जा सकती है। कॉम्प्रिहेंसिव प्रोस्थेटिक्स एंड ऑथरेटिक्स (सीपीओ) में एक विशेष फुट केयर प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसमें पैरों को सुरक्षा कवच और समर्थक उपकरण प्रदान करते हुए पैरों के बचाव का प्रयास किया जाता है।

बड़ा कारण डायबिटीज
वर्ल्ड डायबिटीज फाउंडेशन का अनुमान है कि विश्व में पैरों के निचले हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के 40 से 70 प्रतिशत मामले डायबिटीज से ही संबंधित होते हैं और डायबिटीज के कारण पैरों को काटे जाने के 85 प्रतिशत मामले फुट अल्सर से ही शुरू होते हैं। डायबिटीज की तकलीफों में नसों का क्षतिग्रस्त होना और रक्त संचार की खराबी आना शामिल हैं, जो न्यूरोपैथी के रूप में सामने आते हैं। इससे पैरों में अल्सर होने की आशंका बढ़ जाती है और यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है। डायबिटीज पीडित कई लोगों के पैरों की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है और वे त्वचा में किसी तरह की चोट को भी महसूस नहीं कर पाते। यह चोट बढ़कर संक्रमित अल्सर भी बन जाती है। त्वचा की इस तरह की चोट का इलाज करना मुश्किल हो जाता है, जिस कारण यह बढ़कर गैंगरीन (मांस सड़ाने वाला घाव) बन जाता है। पीडित लोगों की जिंदगी बचाने के लिए पैर काटना जरूरी हो जाता है।

diabetics
सीपीओ (कॉम्प्रिहेंसिव प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स) में मरीजों के पांव का 3डी प्रभाव जानने के लिए इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। पैरों की प्रकृति के अनुरूप यह समाधान तैयार हो पाता है। अत्याधुनिक सीएडी सीएएम मशीन विशेष प्रकार के फुट ऑथरेटिक्स (फुट इनसोल्स) बनाने में भरपूर सहयोग करती है। फुट ऑथरेटिक्स बनाने के लिए इस्तेमाल सामग्री वजन, गतिविधियों और पैथोलॉजी अनुपात के अनुसार बनाई जाती है, जिससे अधिकतम शुद्घता सुनिश्चित होती है।

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