गर्मी के मौसम में बच्चों को होने वाली बीमारियों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में चिकित्सक बच्चों को धूप और गर्म हवाओं से दूर रखने की सलाह दे रहे हैं।
गर्मी का पारा चढ़ने के साथ ही मौसम में बीमारियों की बाढ़ आ जाती है जिनसे प्रभावित होने वालों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक होती है क्योंकि बच्चों में बीमारी से लड़ने की क्षमता व्यस्क से कम होती है। इसलिए इनको नजरअन्दाज करने पर घातक परिणाम हो सकते हैं। इस मौसम में होने वाली बीमारियों में सनस्ट्रोक, पानी के द्वारा फैलने वाली बीमारी, उल्टी, दस्त, पेचिस, टाइफाइड, कालरा, पीलिया आदि प्रमुख हैं। वहीं खान-पान सम्बन्धित बीमारी जैसे फूड प्वाइजनिंग इत्यादि, चर्मरोग जैसे दाने, धमौरी फोडे़, एलर्जी स्वॉस सम्बन्धित, सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से होने वाली एलर्जी, मच्छरों द्वारा फैलाये जाने वाली बीमारियों जैसे मलेरिया, डेगूं आदि भी गर्मी में अपना प्रकोप बढ़ा लेती हैं। ऐसे में चिकित्सक इन सभी बीमारियों से बचाव के लिए अपने आस-पास के वातावरण को स्वस्च्छ रखने की सलाह दे रहे हैं। खासतौर से मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। चिकित्सकों के मुताबिक गर्मी में बीमारियों से बचाव के लिए पानी नियमित रूप से ही उबाल कर ही पिलायें और पियें, बाजार के खान-पान से सख्त परहेज रखें, जहां तक हो सके छोटे बच्चों को ऊपर का दूध पिलाये निप्पल का प्रयोग न करें। बाल चिकित्सक डॉ. राम कपूर के मुताबिक छः महीने के नीचे के बच्चों को मॉं के दूध के अलावा कुछ और नहीं देना चाहिए। उल्टी दस्त होने पर मॉ के दूध के साथ ओआरएस का घोल दिया जा सकता है। इसके अलावा बड़े बच्चों को दस्त होने पर उबला पानी ओआरएस का घोल, नारियल का पानी अधिक मात्रा में पेय पदार्थ व सादा खाना अवश्य दें, बच्चों को धूप में न खेलने दें। चिकित्सकों के मुताबिक बुखार आने पर पैरासीटामाल के साथ सादे पानी से बदन को जरूर पोछे, जिससे शरीर का तापमान बढ़ने न पाये। इसके साथ ही घर से बाहर निकलने पर स्वयं तथा बच्चों को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहे। चिकित्सक गर्मी के इस मौसम में बाजार के कटे फल एवं फलों के रस का प्रयोग बिल्कुल नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। वहीं बीमार होने पर अगर बच्चे कि तबियत में सुधार न लगता हो तो तुरन्त उसे मेडिकल चिकित्सा मुहैया कराये। खास बात है कि मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के आगे सभी इंतजाम नाकाफी साबित होने पर डॉक्टर मच्छरदानी का विकल्प ही सबसे बेहतर मानते हैं और इसकी का प्रयोग करने की सलाह दे रहे हैं।

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