उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में कमल खिलाने के प्रयास में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं. अपनी मुश्किलों को देखते हुए बीजेपी लगातार अपनी शाख को बचाने में जुटी है और अपना अस्तित्व बचाना चाहती है, पार्टी को वर्ष 2017 वाले विधानसभा चुनाव में 21 साल बाद जिले की एक मात्र सीट फूलपुर पवई पर अरूणकांत यादव ने कमल तो खिलाया था, लेकिन वर्ष 2022 में अरूणकांत यादव के पिता बाहुबली रमाकांत यादव को समाजवादी पार्टी ने इसी सीट से टिकट देकर पासा पलट दिया है और भाजपा की मुश्किलों को बढ़ा दिया है, जिसके बाद क्षेत्र में राजनीति गरमा गई है, जिससे भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है.
पिता और पुत्र छाए सुर्खियों में
इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फूलपुर पवई से अरूणकांत यादव को टिकट दिया और अरूण कांत यादव ने इस सीट पर न केवल कमल खिला दिया बल्कि जिले में पिछले 21 वर्षों से मुरझाये कमल को खिला दिया था लेकिन अबकी बार अरुण कांत के पिता रमाकांत यादव को समाजवादी पार्टी ने इसी विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया है. जिसके बाद क्षेत्रीय राजनीति में पिता और पुत्र इनदिनों सुर्खियों में बने हुए हैं पुत्र की सीट पर पिता की दावेदारी ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. पार्टी ने पिता और पुत्र आमने-सामने न हो इसके लिए रणनीति को बदल दिया. पार्टी अब अरूणकांत को इस सीट से लड़ाने का फैसला नहीं किया है, पार्टी इस सीट से अब नये उम्मीदवार की तलाश कर रही है जो बाहुबली रमाकांत यादव को कड़ी टक्कर दे सकें और सपा के गढ़ में डूबती भाजपा की नाव को उबार सके.
BJP शीर्ष नेतृत्व ने दिया आश्वासन
मीडिया से बातचीत में फूलपुर विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक अरूणकांत यादव ने बताया कि उनकी सीट से उनके पिता को समाजवादी पार्टी से टिकट मिल गया है, जिसके कारण पार्टी ने उनको इस सीट से लड़ने से मना कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि उन्हें एमएलसी का चुनाव ही लड़ाया जायेगा, उन्होंने कहा कि इस सीट से भाजपा जिसे भी अपने पार्टी का उम्मीदवार बनायेगी वे उसके पक्ष में चुनाव प्रचार करेगें और जो भी शीर्ष नेतृत्व चाहेगी उसी के अनुसार हम सभी कार्य करते रहेंगे.

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