अरविन्द शर्मा
लखनऊ। अयोध्या विवादित ढांचा विध्वंस केस में कल यानी 30 सितंबर को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा अहम फैसला सुनाया जाएगा। इस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती जैसे कई बड़े नेता आरोपी हैं। ऐसे हाई प्रोफाइल मामले में फैसले के मद्देनजर अयोध्या और लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। फैसले के मद्देनजर अयोध्या में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। डीआईजी दीपक कुमार के मुताबिक, सीआईडी और एलआईयू की टीमें सादी वर्दी में तैनात कर दी गई हैं। बाहरी लोग अयोध्या में आकर माहौल न बिगाड़ने पाएं इसको लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। केस में आरोपी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं रहेंगे। बताया गया कि कोरोना महामारी और स्वास्थ्य कारणों के चलते दोनों नेताओं ने लखनऊ नहीं जाने का फैसला लिया। दोनों लोग दिल्ली से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट की कार्यवाही में उपस्थित रह सकते हैं। अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को राम जन्मभूमि प्रांगण में इस विवादित ढांचे को गिरा दिया गया था। इसमें बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई की अदालत 27 साल बाद इस मामले में फैसला सुनाएगी। तब इस मामले में कुल 50 एफआइआर दर्ज हुई थी। तीन जांच एजेंसियों ने मिलकर इसकी विवेचना की। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके यादव 30 सितंबर (बुधवार) को विवादित ढांचा विध्वंस मामले में फैसला सुनाएंगे। सीबीआइ ने कई चरणों में आरोपपत्र दाखिल कर अभियोजन पक्ष को साबित करने के लिए 994 गवाहों की सूची अदालत में दाखिल की। इस फैसले के आने से पहले आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की कमेटी आन बाबरी मस्जिद तथा बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने कहा कि वह फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

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