कोविड-19 के उपचार के लिए रूस द्वारा वैक्सीन ‘स्पूतनिक वी’ का पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके असरदार होने और इस्तेमाल के लिए सुरक्षित होने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे है। वहीं रूस ने इन सभी आरोपों को आधारहीन बताया है। वहीं रूसी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ विकसित की गई वैक्सीन निश्चित रूप से कारगर है और यह अन्य देशों को भी उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन घरेलू स्तर पर इसकी मांग को ध्यान में रखकर आपूर्ति करना हमारी पहली प्राथमिकता है।

रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा है कि मैं समझता हूं कि हमारे विदेशी साथी वैक्सीन विकसित करने में मामले में प्रतिस्पर्धा महसूस कर रहे हैं इसलिए उन्होंने ऐसे विचार व्यक्त किए हैं जिन्हें हम आधारहीन मानते हैं। रूस ने वैक्सीन का विकास निश्चित क्लीनिकल जानकारी और डाटा को ध्यान में रखकर किया है।

इससे पहले रूस मंगलवार को वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) की वैक्सीन को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। यह वैक्सीन अगले साल एक जनवरी से आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। रूस का कहना है कि गैमलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट और रूस के रक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ‘स्पूतनिक वी’ के नाम से जानी जाने वाली कोरोना वैक्सीन सबसे पहले कोरोना संक्रमितों के इलाज में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों को दी जाएगी। इसके बाद एक जनवरी 2021 से यह आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। स्पूतनिक वी को ‘गैम कोविड वैक’ के नाम से पंजीकरण प्राप्त हुआ है लेकिन रूस के पहले उपग्रह स्पूतनिक की लोकप्रियता को देखते हुए इसे स्पूतनिक वी के नाम से वितरित किया जाएगा।

रूस की कोरोना वैक्सीन पर उठ रहे हैं क्या सवाल 

सीसीएमबी के निदेशक राकेश के मिश्रा ने कहा कि यदि लोग भाग्यशाली रहे तो रूस का टीका असरदार साबित होगा। मिश्रा का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को घोषणा की थी कि उनके देश ने कोरोना वायरस के खिलाफ पहला टीका विकसित कर लिया है जो कोविड-19 से निपटने में बहुत प्रभावी ढंग से काम करता है और एक स्थायी रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करता है।

मिश्रा ने कहा कि टीके के असरदार होने और उसके इस्तेमाल के लिए सुरक्षित होने के बारे में अब भी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने उचित परीक्षण नहीं किए, जो तीसरे चरण में किए जाते है। इसी चरण में आपको टीके के असरदार होने के बारे में पता चलता है। इस चरण में बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाया जाता है और दो महीने इंतजार किया जाता है और पता लगाया जाता है कि वे संक्रमित हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता नहीं कि उन्होंने यह (बड़े स्तर पर परीक्षण) किया है, क्योंकि यदि आपने ऐसा किया है, तो हमें डेटा दिखाइए। आप इसे गोपनीय नहीं रख सकते। टीके को लोगों तक पहुंचाने से पहले उसका सावधानी से आकलन किया जाना चाहिए और कोई देश या कंपनी टीके के संबंध में डेटा जारी नहीं कर रही है, तो यह गलत बात है।

मिश्रा ने कहा, ” यह सुरक्षित नहीं है… पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण से गुजरने से पहले टीका उपलब्ध नहीं कराया जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि टीका विकसित करने की कोशिश कर रही दवाइयां बनाने वाली भारतीय कंपनियों को कितनी सफलता मिली है, उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे चरण संबंधी डेटा को अभी प्रकाशित किया जाना है और उनके अगस्त के अंत या मध्य सितंबर में जारी होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यदि पहले और दूसरे चरण के परिणाम उत्साहवर्धक रहते हैं, तो मुझे हैरानी नहीं होगी, क्योंकि कई टीके इन दोनों चरणों में सफल रह चुके है। असल परीक्षा तीसरे चरण में है।

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