नई दिल्ली। वही हुआ जिसका डर था। हजारे और केजरीवाल ने अलग अलग राह पकड़ ली है। केजरीवाल की राजनीति में आने की इच्छा पहले से ही थी और वह इसके लिए अन्ना के नाम का जमकर इस्तेामल कर रहे थे। अब अन्ना ने खुद को अरविंद केजरीवाल से लगभग अलग कर लिया है। उन्होंने केजरीवाल को साफ शब्दों में कहा है कि उनके नाम का इस्तेमाल करना बंद कर कर दिया जाए। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और किरण बेदी से मुलाकात के बाद अन्ना ने साफ शब्दों में हिदायत भी दी है कि लेटर कैंपेन के दौरान उनकी तस्वीरों को भी इस्तेमाल न करें।

अन्ना और केजरीवाल के बीच पहले भी कई मौकों पर मतभेद उभरकर सामने आते रहे हैं, लेकिन अन्ना ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही राजनीति पार्टी बनाने के खिलाफ रहे हैं और आगे भी किसी पार्टी के मंच पर नहीं जाएंगे।

बैठक के बाद संवाददाताओं से हजारे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि टीम अलग हो गई है। मैं किसी पार्टी या समूह में शामिल नहीं होऊंगा। मैं उनके प्रचार अभियान में शामिल नहीं होऊंगा। मैंने उन्हें अपना फोटो और नाम के इस्तेमाल से मना कर दिया है। आप खुद से लडि़ए|

गौरतलब है कि हजारे और उनकी पूर्ववर्ती टीम ने पिछले साल मौजूदा सरकार पर यह आरोप लगाया था कि वह करोड़ों रुपये खर्च कर उन्हें तोडऩे की कोशिश में लगी है, लेकिन आज भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के अगले स्वरूप को लेकर हुई बैठक में अन्ना की अगुवाई वाला टीम अन्ना आंदोलन बिखर गया।

अन्ना के नेतृत्व में यहां जंतर मंतर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध पहला अनशन 2011 में अप्रैल महीने में हुआ था। केजरीवाल पर हमला करते हुए हजारे ने कहा कि अगर जनता का भारी समर्थन राजनीतिक दल के गठन के पक्ष में था तो फिर आज की बैठक बुलाई ही क्यों।

बंद कमरे में यहां नौ घंटे से ज्यादा चली बैठक के बाद हजारे ने कहा कि केजरीवाल और उनके रास्ते अलग हो गए हैं । उन्होंने केजरीवाल को नयी पार्टी की शुभकामनाएं दी।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि पार्टी बनाने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है लेकिन मैं पहले से कहता रहा हूं कि चुनाव नहीं लड़ूंगा और उन्हें मेरी शुभकामनाएं रहेंगी।

हजारे ने इंडिया एगेंस्ट करप्शन द्वारा कराए गए जनमत सर्वेक्षण को भी खारिज कर दिया और कहा कि मुझे फेसबुक, इंटरनेट के माध्यम से कराए गए सर्वेक्षण पर भरोसा नहीं है।

हालांकि उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टी का गठन करना दोष नहीं है और ना ही चुनाव लडऩे वालों का विरोध है। अगर उन्हें लगता है कि उन्हें संसद में बहुमत हासिल हो जाएगा तो यह अच्छी बात है, हमारे रास्ते अलग हो गए हैं। हम दोनों ने अपना अलग अलग रास्ता चुना है।

जब उन्हें इस बात की ओर इशारा दिलाया गया कि केजरीवाल ने पूर्व में घोषणा की थी कि हजारे के मंजूरी दिए जाने तक वह पार्टी का गठन नहीं करेंगे, उन्होंने कहा कि अगर ऐसी बात है तो पार्टी का गठन नहीं किया जाना चाहिए।

आज हुई बैठक में यहां न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, किरण बेदी सहित कुछ पत्रकार और अन्य लोग शामिल हुए जिसमें एक समूह ने आरोप लगाया कि हजारे का केजरीवाल समूह ने शोषण किया। इसके जवाब में अन्य समूह ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने अन्ना की छवि को उभारा।

आज के घटनाक्रम पर केजरीवाल ने ट्विट किया कि देश बिक रहा है। वह बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा है। मैं अपने देश को बचाने के लिए जो भी संभव होगा करूंगा।
राजनीतिक पार्टी के गठन की विरोधी किरण बेदी ने ट्विट किया कि अन्ना ने आखिरकार खुद को राजनीतिक विकल्प से दूर कर लिया। आंदोलन को मजबूत करने का कदम। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन एकजुट हों|

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