लोकसभा ने सोमवार को निरसन और संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें सौ से डेढ़ सौ वर्ष (150 Year) तक पुराने 58 अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि जो राजद्रोह कानून अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रवाद को दबाने के लिए बनाया था और जिसे महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, पंडित जवाहरलाल नेहरू और भगत सिंह पर लगाया था, उसे अब तक नहीं बदला गया है। थरूर ने कहा कि इस कानून को अब जेएनयू के छात्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाया जा रहा है।

इसका जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो देश को टुकड़े टुकड़े करने की बात कहेगा.. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रसाद ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से पुराने कानून जो अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं और पुराने हैं… उन्हें समाप्त किया जा रहा है। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी । इस विधेयक के माध्यम से जिन 58 पुराने एवं अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है।

लेखापाल चूक अधिनियम 1850, रेल यात्री सीमा कर अधिनियम 1892, हिमाचल प्रदेश विधानसभा गठन और कार्यवाहियां विधिमान्यकरण अधिनियम 1958, हिन्दी साहित्य सम्मेलन संशोधन अधिनियम 1960 शामिल है । इनमें एलकाक एशडाउन कंपनी लिमिटेड उपक्रमों का अर्जन अधिनियम 1964, दिल्ली विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम 2002 भी शामिल है । इनमें धनशोधन निवारण संशोधन अधिनियम 2009, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल संशोधन अधिनियम 2009, नागरिक सुरक्षा संशोधन अधिनियम 2011, प्रौद्योगिकी संस्थान संशोधन अधिनियम 2012, वाणिज्यिक पोत परिवहन दूसरा संशोधन अधिनियम 2014, बीमा विधि संशोधन अधिनियम 2015, निर्वाचन विधि संशोधन अधिनियम 2016 शामिल हैं।

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