कहते हैं ना कि बेटों से कहीं आगे हैं बेटियां। पिता सात साल से जेल में है। मां दूसरे के घरों में बर्तन मांजकर दोनों बेटियों का पेट पाल रही थी, लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था। मासूम बच्चियां अपनी बीमार मां की देखभाल कर रही हैं। इलाज करवाने के साथ साथ घर का खर्च भी चला रही हैं। एक माह पहले चक्कर खाकर गिरी मां को आज तक होश नहीं आया है। डॉक्टर कहते हैं कि वह कोमा में है। घर में जो था, वह बिक कर इलाज में लग गया। अब न इलाज को पैसे हैं और न बच्चियों को पेट भरने के लिए रोटी लेकिन इन बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी है। जिला अस्पताल में भर्ती इस महिला की दोनों बच्चियों की बेबसी को जो भी देखता है, उसका दिल भर आता है। जिन बच्चों को मां-बाप के साए की जरूरत है, वही आज मां का साया बनी हुई हैं। थाना आरसी मिशन के ग्राम कनेंग का अशोक सिंह ड्राइवर था। एक दिन गाड़ी बुकिंग में ले गया तो अपहरण के मामले में पकड़ा गया। सात साल से वह जेल में है। पति के जेल जाने के बाद गीता और उसकी दोनों बेटियां बेसहारा हो गई। बड़ी बेटी ज्योति अब चौदह साल की है और नवीं में पढ़ती है और छोटी शिवानी सातवीं की छात्रा है। पति जेल गया तो ससुराल वालों ने भी मुंह फेर लिया। गीता के भाई अरविंद शहर में दानामियां की मजार वाली गली में रहते हैं। उन्हीं के नजदीक गीता भी किराए का कमरा लेकर रहने लगी। दोनों बच्चियों के पालन पोषण के लिए उसने घरों में बर्तन मांजने शुरू कर दिए। जैसे भी थी, गुजर हो रही थी। लेकिन एक माह पहले फिर बज्रपात हुआ। गीता एक दिन चक्कर खाकर गिरी तो फिर उसे होश नहीं आया। भाई अरविंद उसे जिला अस्तपाल लेकर आया तो उसे बरेली रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि दिमाग की नस फट गई है। अब वह कोमा में है। बेचारे भाई के पास जो था सब इलाज में लगा दिया। गीता के घर जो पैसा था वह भी दवाओं में खर्च हो गया। इलाज के लिए पैसे नहीं बचने पर गीता को बरेली से यहां ले आए और जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉक्टरों के अनुसार उसके इलाज में एक लाख से अधिक का खर्च आएगा। लेकिन बच्चियों के पास तो रोटी खाने को भी पैसे नहीं हैं, मां का इलाज कैसे कराएं? दोनों बेटियां दिनभर मां की देखभाल में जुटी रहती हैं। अस्पताल के स्टाफ को भी उनसे सहानुभूति है। इस परिवार को लोगों के मद्द की सख्त जरूरत है।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.