आपने आज तक गगनचुम्बी इमारतों में कुतुबमीनार को देखा और सुना होगा। लेकिन गगन को छुने वाला कृष्ण मंदिर अब जल्दी ही देख पायेंगे। kutumb mandi_200_200 में बनने वाले इस मंदिर की परिकल्पना इस्कॉन के अनुयायी बाबा मधुरदास ने की है। इस मंदिर का निर्मार खुजराहो और आधुनिक शैली की कला से किया जायेगा। मन्दिर का इंटीरियर डिजायन विदेशी शिल्पकारों को सौंपा गया है। मन्दिर 60 एकड़ भूमी में बनेगा। इसका आधारभूत ढांचा 4 एकड़ में होगा। पहले चरण में 150करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसके बाद 60 मंजिलों के निर्माण व साज सज्जा पर 250 करोड़ रूपये और खर्च होंगे। इसका शिखर कुतुबमीनार से 3 गुना ज्यादा यानी 700 फीट ऊँचा होगा। इसलिए इसका नाम चंद्रोदय मन्दिर रखा गया है। 400 करोड़ की लागत से बन रहे इस देवालय में श्रीकृष्ण राधारानी के साथ बिहार करते नजर आयेंगे। 16 मार्च को इसकी आधारशिला रखी जायेगी। इस अवसर पर राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के आने की संभावना है।
चंद्रोदय मंदिर परिसर के चारों ओर कल कल यमुना बहती दिखाई देगी। जिसके किनारे खड़ेे होकर श्रद्धालु यमुना पूजन का लाभ ले सकेंगे। मंदिर के चारों ओर ब्रजमंडल के 12 वन स्थापित किए जाएंगे। जिससे पूरे ब्रज का दर्शन एक ही स्थान से कर सकेंगे। मंदिर मार्ग में वेलकम प्लाजा शॉपिंग मॉलए फूड कोर्ट के अलावा 500 कमरों का गेस्टहाउस भी बनेगा। इसमें ठहरने वाले श्रद्धालुओं को पांच सितारा सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। मंदिर के निकट ही माधव कुटीर में 100 डुप्लेक्स निर्माण कराए जाएंगे। ये मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं को आजीवन निवास करने के लिए दिए जाएंगे। वृंदावन में छटीकरा मार्ग पर अक्षयपात्र में चंद्रोदय मंदिर का निर्माण किया जाना है।

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