लखनऊ। कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण के कारण अब शैक्षणिक कार्य तथा शैक्षिक सत्र भी प्रभावित हो रहा है। प्रदेश सरकार इसको पटरी पर लाने के प्रयास में नित नए-नए जतन कर रही है। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय तथा डिग्री कॉलेजों में स्नातक प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र अगली कक्षा में प्रोन्नत होंगे।  राज्य विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज, प्राविधिक विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग तथा मैनेजमेंट कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातक (यूजी) व स्नातकोत्तर (यूजी) के फाइनल ईयर के विद्यार्थी परीक्षा देने के बाद ही उत्तीर्ण घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य सभी छात्र प्रोन्नत किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग यह फैसला पहले ही ले चुका है, जिससे लगभग 35 लाख छात्र लाभान्वित होंगे।

राज्य विश्वविद्यालय व कॉलेजों के यूजी-पीजी फस्र्ट और सेकेंड ईयर के 33 लाख विद्यार्थी तथा प्राविधिक विश्वविद्यालयों, इंजीनियिरंग कॉलेज और मैनेजमेंट कॉलेजों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने के लिए दो विकल्प दिए हैं। विश्वविद्यालय चाहें तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सुझाव के अनुसार या फिर शासन द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो.एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित कमेटी की सिफारिशों के अनुसार प्रोन्नत कर सकते हैं।

प्रदेश के डिप्टी सीएम तथा उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने मीडिया को बताया कि स्नातक में प्रथम तथा द्वितीय और परास्नातक में प्रथम वर्ष के सभी छात्र-छात्राओं को आंतरिक मूल्यांकन व पिछली कक्षा में मिले अंकों के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। वहीं स्नातक तृतीय वर्ष और परास्नातक द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं होंगी। परीक्षाएं ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन दोनों मोड में होंगी। परीक्षा का समय कम होगा और बहुविकल्पीय प्रश्न भी पूछे जा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश के विश्वविद्यालय 23 जुलाई तक अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा का कार्यक्रम तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंपेंगे। इसके साथ ही 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा ऑफलाइन या ऑनलाइन कराने का भी निर्देश दिया गया है। इसके बाद 15 अक्टूबर तक स्नातक अंतिम वर्ष और 31 अक्टूबर तक स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष का परिणाम घोषित करने का भी निर्देश दिया गया है।

डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के दृष्टिगत छात्रों के स्वास्थ्य व सुरक्षा सिद्धान्तों के साथ उनको पारदर्शी एवं समान अवसर को महत्व देने की योजना तैयार की है। इसके लिए शैक्षणिक विश्वसनीयता, व्यवसाय का अवसर और वैश्विक स्तर पर छात्रों के भविष्य की प्रगति को सुनिश्चित किया जाएगा। इस संकट में भी छात्रों के शैक्षिक मूल्यांकन तथा परीक्षा में प्रदर्षन के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास एवं संतुष्टि का भाव उत्पन्न करने के साथ क्षमता, प्रदर्शन, विश्वसनीयता को वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रतिबिंबित करने की तैयारी है। इन सभी के दृष्टिगत आगे परीक्षाएं सम्पन्न कराने और परिणाम घोषित करने तथा आगामी सत्र के शैक्षणिक कैलेण्डर के बिन्दुओं को सम्मिलित किया गया है।

कोविड-19 वैश्विक महामारी को देखते हुए विश्वविद्यालयों का सत्र नियमित रहे। छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो, इस परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों से यह अपेक्षा की गयी है कि विश्वविद्यालय गाइडलाइन विकल्पों को ध्यान में रखते हुये अपनी परिनियमावलियों एवं अपने छात्रों की आवश्यकता के अनुरूप अपने कार्य परिषद से विचार कर निर्णय लेकर परीक्षा के कार्यक्रम के साथ अपनी कार्ययोजना शासन को 23 जुलाई, 2020 तक प्रेषित करेंगे।

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