बिना लक्षण वाले मरीजों को घर में रखने की योजना को अधिकारी तरजीह नहीं दे रहे हैं। मरीजों को होम आइसोलेशन के फायदे तक नहीं बात रहे हैं। यही वजह है कि लोगों में जागरूकता की कमी है। होम आईसोलेशन के बजाए अस्पताल में भर्ती किए जा रहे हैं।

यूपी में अब तक 10 हजार से ज्यादा मरीज कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने बिना लक्षण वाले मरीजों को घर में आईसोलेट करने का फैसला किया था। करीब 80 से 85 प्रतिशत मरीज बिना लक्षणों वाले हैं। केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश के मुताबिक बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए घर में रहना अधिक फायदेमंद हैं। अस्पताल में अधिक गंभीर मरीज के भर्ती होने से कम लक्षण वाले मरीजों की सेहत पर खराब असर पड़ सकता है। बिना लक्षण वाले मरीजों में भी वायरस लोड बढ़ सकता है।

दिलचस्पी नहीं दिखा रहे अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चार जिलों में तो अभी तक होम आईसोलेशन का खाता तक नहीं खुला। इन जिलों में एक भी मरीज होम आईसोलेशन में नहीं रखे गए। इनमें हापुड, हाथरस, जालौन और बुलंदशहर है। इन शहरों में अब तक 500 से 1500 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं।

आंकड़ा पांच के भीतर है
प्रदेश के चार जिले ऐसे हैं जिनमें दो से पांच मरीजों ने ही होम आईसोलेशन के विकल्प को चुना है। बागपत में चार, फिरोजाबाद में एक, चित्रकृट में दो और हमीरपुर में चार मरीज अब तक होम आईसोलेशन में रखे गए हैं।

लखनऊ टॉप पर
यूपी में 16 हजार 530 से ज्यादा मरीज होम आईसोलेशन में रखे गए हैं। सबसे ज्यादा लखनऊ के मरीज होम आइसोलेशन को तरजीह दे रहे हैं। लखनऊ में 2,556, गोरखपुर में 1,302, कानपुर में 1,233 मरीजों ने होम आईसोलेशन का विकल्प चुना। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि अब तक 2,530 संक्रमित होम आईसोलेशन का पूरा वक्त गुजार चुके हैं। इन्हें किसी भी प्रकार का कोई लक्षण या परेशानी महसूस नहीं हुई है। होम आइसोलेशन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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