अमेरिका के बढ़ते दबाव के कारण पाकिस्तान अब सरक्षित ठिकाना नहीं रहा। इब्राहीम कास्कर के भारत आने के बाद बाद डान का दूसरा भाई मुस्तकीम भी मुम्बई आने के जुगाड़ में

dawood ibrahimदाउद अब पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है। अमेरिका पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर शिकंजा कसता ही जा रहा है। 1993 के मुम्बई बम विस्फोट के आरोपी दाउद को डर सता रहा है कि कहीं अमेरिका भारत से नजदीकिया बढ़ाने व दुनिया में अपनी आतंकवाद विरोधी छवि को और मजबूत बनाने के लिए उसका खात्मा ही न कर दे। जब अमेरिका ने  ओसामा का सफाया कर दिया तो फिर दाउद क्या चीज है। अमेरिका से डरा दाउद इसके मुताबिक दाऊद अपने घरवालों को एक-एक कर भारत भेजना चाहता है और यह समर्पण भी उसी योजना का हिस्सा है। इससे पहले भी दाऊद का एक अन्य भाई इकबाल कासकर दुबई के रास्ते भारत आ चुका है और अब उसके दूसरे भाई ने भी ऐसी ही इच्छा जताई है। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ जारी अमेरिकी लड़ाई और पकिस्तान पर बढ़ रहे दबाव के कारण दाऊद एक-एक कर अपने सगे सम्बन्धियों को सुरक्षित भारत वापस भेजना चाहता है। मुस्तकीम का सरेंडर करना भी इसी प्लान का हिस्सा हो सकता है। कुख्यात दाउद का छोटा भाई मुस्तकीम पिछले दिनों कराची से भागकर दुबई चला गया था। उसने दुबई में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है और उसने भारत लौटने की इच्छा जताई है। मुस्तकीम के पाकिस्तान छोडक़र दुबई चले जाने की वजह डॉन के घर में घमासान को बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस के सूत्रों के कहना है कि यह वाकया करीब दो हफ्ते पुराना है। 2005 में इकबाल कासकर ने भी दुबई में ही सरेंडर किया था जिसके बाद वह भारत भेज दिया गया था। यहां उसे सारा-सहारा कॉम्प्लेक्स घोटाले में गिरफ्तार किया गया, लेकिन जल्द ही वह इस मामले से बरी हो गया। हालांकि, अगर दाऊद भी भारत वापस आता है तो उसके खिलाफ मुक़दमे चलाना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि उसके खिलाफ ज्यादातर मामले बहुत पुराने हैं और उनके ज्यादातर गवाह या तो मर चुके हैं या लापता हैं। दाऊद को दो साल पहले हार्ट अटैक भी हो चुका है। भारत का मानना है कि दाउद कराची में सुरक्षित ठिकानों पर रहता है लेकिन जांच एजेंसियों को उसकी भनक नहीं लगती है। पाकिस्तान सरकार इससे इनकार करती है कि दाऊद उनके यहां है। हालांकि मुस्तकीम की गिरफ्तारी से पुलिस को दाऊद के ठिकानों के बारे में कुछ सुराग मिलने की उम्मीद है। मुस्तकीम डी-कंपनी के ड्रग्स और हवाला कारोबार के बारे में भी कुछ अहम सुराग दे सकता है। बताते चलें कि  मुम्बई में दाउद के गुर्गे अभी भी बेखौफ हैं। उसका नमूना उस समय देखने को मिला जब महाराष्ट्र के नागपाड़ा में दाऊद की जब्तशुदा दो सम्पत्तियों को नीलामी हुई। इस नीलामी में दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव को उनके हक के बावजूद दाऊद की बहन और दाऊद के गुर्गों ने कब्जा ही नहीं लेने दिया। वकील पर कई हमले किए गए। वह सम्पत्ति आज तक दाऊद के खौफ-साम्राज्य का हिस्सा है। हालांकि भारत में भी दाउद की राह आसान नहीं है। दाउद के आर्थिक सम्राज्य  के खिलाफ रिजर्व बैंक के हमले की पहल को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि भारत में भी दाउद की राह आसान नहीं है। 1993 में मुम्बई में हुए बम विस्फोटों के आरोपी और मोस्ट वांटेड अपराधी दाउद इब्राहीम की काली कमाई पर रिजर्व बैंक ने नजरें गड़ाई हैं। दाउद का दबदबा खत्म करने के लिए पहली बार उसके आर्थिक साम्राज्य को निशाना बनाया गया है। दाउद के पास 12 हजार  करोड़ रुपए से अधिक की दौलत है, जो दुनिया की कई कम्पनियों की सम्पत्ति से कहीं अधिक है।  विदेश मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी गोपनीय निर्देश के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने राष्ट्रीय कृत बैंकों, शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों, वित्तीय संस्थानों और क्षेत्रीय बैंकों के प्रमुखों को विस्तृत निर्देश भेजा है और वह लिस्ट भी भेजी है जिसमें आतंकी संगठन अल कायदा से जुड़े सदस्यों और उनकी मदद पहुंचाने वाले लोगों के नाम हैं जो भारत के विभिन्न राज्यों में सक्रिय हैं। यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी नाम के सूची से मिलने या किसी भी नाम पर संदेह होने की स्थिति में तत्काल प्रभाव से रिजर्व बैंक के साथ-साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो और राजस्व खुफिया ब्यूरो को सूचित करने को कहा गया है।
भारत के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दाउद पाकिस्तान में है लेकिन पाकिस्तान इसका खंडन करता रहा है। दाउद को बचाने के लिए पाकिस्तान अमेरिका को हमेशा से ही तर्क देता है कि दाऊद भारतीय है और वह एक बड़ा अपराधी है लेकिन आंतकवादी नहीं। अब जब कि अमेरिका पाकिस्तान की कीमत पर भारत की अनदेखी नहीं कर सकता इसलिए उसने  दाऊद इब्राहीम और उसके दो साथियों छोटा शकील और टाइगर मेनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। उधर आतंकी और आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बनते जाने के कारण नेपाल भी संकट के दौर से गुजर रहा है। दाउद के खिलाफ अगर नेपाल भारत के साथ आता है और उधर अमेरिका दाउद के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाता हैं तो दुनिया के मोस्टवांटेड अपराधी  को धर दबोचना कतई मुश्किल नहीं। दाउद के आर्थिक सम्राज्य  के खिलाफ रिजर्व बैंक के हमले की पहल को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

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